चाणक्य नीति दर्पण | Chanakya Niti Darpan

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Chanakya Niti Darpan by बाबू दीपचन्द - Babu Deepchand

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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अध्याय ३ | १ कि देखनेमें वह मनुष्य हैं परत यथाथ देखेतो दो पांवका पशु है और चाक्यरूप कांटेको बेघता है जैसे अन्ध को काँदा ॥ ७ ॥ रूपयावनसम्पन्नावशाछकछसम्मघा वेव्याही नानशो भन्तेनिर्गंधाइव किंशका ॥0८॥। ठाका-ख़दरता तरुणता आार श्रर कलम जन्म इनके रहतेभी विद्याहीन परप चिनागन्ध पलाशदाक के फतके समान नहीं शोभति ॥ ८ ॥ कोकिलानांस्वरोरूप॑स्त्राणांरूपंपत्तिन्रतस ॥। वेंदारूपंकरूपाणांक्ष मारूपंतपंस्विनाम ॥९॥ उाका-कााकेलाका मामा रवर है ।ख्रयाका स्याभा पातचत करूपाका शासा उवध्या हु तपास्वयाका शाभा क्षमा ह ॥ ९ | त्यजेंदेकं कुलस्पार्थप्रामस्थार्थेकुलंत्य जेतू ॥ ६८ च्डि दी ..कन- १०५५ ग्रामजनपदस्पार्थद्मात्मार्थ पाथिवीत्य जेतू। १०॥। राका-कलक नाम एकका छाडदूना चाहय ग्राम के देते कलका याग उचित हैं देदके अथे यामका आर अपने अथ पथिवीका अथातू सबका [गही उचित है ५ १० ॥ उच्पेोगिनास्तिदारिय्य॑ं जपतोनास्तिपातकम ॥ माने नकलड्दोनास्तिनास्ति जागारतिमयस। 9 १।




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