ग़ज़ल संग्रह भाग 1 | Gajal Sangrah vol - I

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutGovind Singh Thakur
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
3.34 MB
कुल पष्ठ :
72
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about गोविन्द सिंह ठाकुर - Govind Singh Thakur
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)'कसकिकिवेदी-िफे- कट ली. दा, बैनर दि, दर, ेद, कील ।.5:8.5 6; है. कक,ही...उ>सयमनमाग ८ १ -गसल २७1
सरते दमन जिसकी जुदपर सास ईश्वर अणिया ।बेघड़स हो वोटह्ी जने बैकेंठ को सीघागया या :
छोड स्ायाजाल जिसने नाम परयइवर रटठा ।
छूटा आवागप्त उसका ये वे! पढदुची 'वोगया | |
जो विमूुख उस सामसे हग्श सम उसका भी ट्वाल।
नौॉँघरर पमदूत उसकों नें थे लेजायगा ॥
जो गया दुनियां से बफेर उसझा पता पाया सही 1 2। खाई घरती या बम्बः टूद उसको खांगया पा !जिसका सोइुनलाल कुछ घर्ती 'दू्याएँं ध्यान हु 1
पाकें पदवी स्वगक्की दो होके बेपरवा मैया ॥ |
दल ': गजल ॥२६॥ ;
रा इंडवर मा छलका जो बशर अपने लटाले- हूं । $
तो कछ च्ानन्द इस ससार का बोर उठाते हैं ॥ |
बढ़ी पदवी उन्हें मिलती हे इस संसार सायर सें । .)
कि जो हस्ती को च्मपदी राह हेडचर में मिटाते :हूं॥
नजर इस जहूर उलका.हरएक ज़रंम आता, दे,
हुरएक॑ जन जों कि ।जिलकों तीरथां से कूद चात-द्द का _4 जो जन. सक्तीमें उसकी जानो तनमपना लगाये हूं: ।कै».जहाँ चाई दुर्श फिर वो वहीं बस उसका पाते
'गिरंदा' तीनों पतन गफलतलद्दी गफलत मे गये तेरे । |
रहें दें दिन जो बाक़ी ये भी न्मब बेकॉर जतिना :
User Reviews
No Reviews | Add Yours...