वक्त-ए-जिंदगी | Waqt-E-Zindgi

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Waqt-E-Zindgi by आशीष कुमार शुक्ल - Ashish Kumar Shukla

एक विचार :

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

नाम- आशीष कुमार शुक्ल पुत्र श्री शोभा शंकर शुक्ल एवं श्रीमती हीरावती शुक्ला
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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श्री गणेशाय नमः मेरी यह काव्य संग्रह वक्त ऐ जिंदगी मेरे पूज्यनीय दादा स्वर्गीय पं. श्री चन्द्रबली शुक्ल को समर्पित है जो हमेशा ही धार्मिकता व नैतिकता की शिक्षा देते रहे है लेखक की कलम से कविता जीवन की एक ऐसी सारथी है जो हमें एक नई दिशा, नई सोच व मन को अधिक ऊर्जा देती है कविता मन की भाव होती है जो एक लेखक के भाव को उसके संदेशो को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में सामने रखती है। लेकिन यहाँ यह भी कहना उचित होगा कि कविता के शब्दों को पिरोकर उसके कई अर्थ निकाले जा सकते है यह पढ़ने वाले के भाव पर निर्भर करता है कुछ कविताएं अपना अर्थ सीधा-सीधा प्रकट कर देती हैं लेकिन कुछ कविताओं के भावार्थ छिपे होने के कारण उसके कई अर्थ निकाले जा सकते है कि एक कवि क्या कहना चाह रहा ___मुझे बचपन से ही कविताएं व लेख लिखने का शौक रहा है जब भी कभी मन उदास होता है या फिर समाज के किसी हिस्से को देखता हूँ तो अचानक मेरे मन का भाव कविताओं व लेखों में तब्दील हो जाता है और मै लिखने बैठ जाता हूँ जिससे मेरे मन को शान्ति मिलती एक दिन मै पंजाब विश्वविद्यालय के पूर्व उप - कुलपति प्रोफेसर के.एन. पाठक की जीवनी पढ़ा और मैं उनके संघर्षपूर्ण जीवनी से काफी ओतप्रोत हुआ जो मुझे एक प्रेरणा दे गई फिर मैने कलम उठाई और 'अपनी मंजिल' शीर्षक नामक कविता लिखी।




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