आचार्य शुक्ल के समीक्षा सिद्धांत | Aacharya Shukla Ke Samiksha Sidhant

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Aacharya Shukla Ke Samiksha Sidhant by रामलाल सिंह - Ramlal Singh

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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४. नवाँ अध्याय सेद्धान्तिक समीक्षा को झाचाय शुक्ल की देन ४८४५-५१ भारतीय समीक्ता-शाख्र का पुनरनिर्माण हिन्दी-समीक्षा को स्वतंत्र दृष्टि पुष् तथा व्यापक सैद्धांतिक झाधघार तथा सादित्यिकता का समन्वय हिन्दी- सादित्य की प्रकृति तथा सम्पत्ति की रक्ता साहित्य-रुपो की श्रमिनव-प्रतिष्टा साहित्य-इतिहास-विधायक दृष्टिकोण सांस्कृतिक पीठिका सजनात्मक प्रेरणा सुनिश्चित व्यापक जीवन-द्शन सामाजिक जीवन-मूल्यो की प्रतिष्ठा लोक-मंगल तथा लोक-मर्यादा की साहित्यिक मानो के रूप में प्रतिष्ठा झाघुनिक समीक्षा की प्रेरणा- शक्तियों की सन्निहिति सैद्धांतिक समीक्षा की मौलिकता रस-सिद्धांत की व्यापकता रस-सिद्धांत की मौलिक सामग्री मौलिक विवेचन-शैली युगानुरूप नवीन व्याख्या नवीन महत्व-प्रतिपादन नवीन संबंध-स्थापन नवीन संश्लेषण नवीन बल प्राचन रस-विवेचन संबंधी त्रुटियों के दूरोकरण का प्रयत्न शुक्लजी के झंग-सिद्धांतों की देन प्राचीन काव्य-दर्शन का झभिनव-रूप भारतोय तथा पश्चिमी आह्म सिद्धांतों का समथन एवं झाग्राह्म सिद्धांतों का निराकरण समीक्षा का राष्ट्रीय आदर्श हिन्दी- समीक्षा को विश्व-समीक्ता की भूमिका पर सांस्कृतिक श्रादर्श प्रामाणिकता प्रगादता तथा घनता 1 परिशिष्ट १-- संकेत-सूची उपस्कारक अ्न्थों की नामाचुक्रम णिका संस्कृत-ग्रंथ ।- वेदिक साहित्य लौकिक साहित्य काव्य-शा्र दार्शनिक श्ौर अन्य श्रन्थ हिन्दी ग्रंथ मराठी-ग्रंथ हिन्दी-पत्र-पत्रिकायें - आंग्ल-साहित्य-ग्रंथ - झांग्ल-पत्र तथा पत्रिकायें ।-




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