वैदिक आदर्श | Vaidik Adarsh

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Vaidik Adarsh by श्रध्दानन्द जी शर्मा - Shradhanand ji Sharma

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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( १ ) नियमों पर ध्यान देने से ही उसके गोरव और महत्व का कुछ- कुछ अन्लुमान हम जीव कर सकते हैं । उसके सहारे प्रथिवी श्र सारे के सारे आनन्द हैं । कारण कि वद्द '्यानन्द- धघर्मा हे, शांति का सागर है | शांति के उस सागर में पहुंचकर पापामि से मुलसे हुए हृदय शांत हो सकते हैं। श्मानन्द-धर्ना में ही पहुंचकर दुःखित 'छान्त: करण सख्त पान कर सकते हैं । ऐसे, छानन्द और सुख के धनी परमात्मा, धर्म के शत्रुओं का. सदा विनाश करते हैं, उनके उत्तम नियमों के घिरुद्ध चलकर - कोई भी पापी दुःख से नददीं वच सकता । पापी को शिक्षा देखे के लिये; उसे पाप से दूर करने के लिए द्यालु पिता संदेव उसे ताड़ना देते हैं. । में उसके नियमों में चलते हुए शत्रुओं से रक्षा : के लिए उसी ईश्वर से सहायता मांगनी उचित है । पाप को दूर , करने में सांसारिक, 'झसार वस्तुओं व छुच्छ जीवात्मा से हमें पर्याप्त सद्दायता कद्दां मिल सकती है ? माणों के प्राण परमेश्वर . की छानन्त शक्ति 'पर विश्वास करके मनुष्य सच प्रकार के दुखों से छूट जाता है । परमपिता हम सब जीवोंमें अपनी भक्ति शोर . प्रेम का भाव स्थापित करें ।




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