तमिळ साहित्य | Tamil Sahitya

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Tamil Sahitya  by रामधारी सिंह दिनकर - Ramdhari Singh Dinkar
लेखक :
पुस्तक का साइज़ : 11.54 MB
कुल पृष्ठ : 213
श्रेणी :
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रामधारी सिंह दिनकर - Ramdhari Singh Dinkar

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11 में हमारे देश की जन-संख्या बहुत बड़ी है किन्तु हम उन देशों के मोलिक विचारकों को संख्या को देखें तो हम प्रायः अज्ञ और श्रनपढ़ ही कहलाएंगे क्योंकि हमारी शिक्षा एक विदेशी भाषा के माध्यम से होती है और हम उसी विदेशी भाषा में सोचते हैं । मोलिक कार्य के लिए यह आवश्यक है कि हम आजादी से और अपने हो ढंग से सोचें और यह स्वाभाविक वातावरण मे हो हो सकता है और इसीलिए साठ- भाषा को शिक्षा का माध्यम बनाना आवश्यक है। दुर्भाग्य से हमारे देवा की वस्तुस्थिति क्ञायद ही इस उद्देश्य की पति की ओर ल॑ जाने- वाली हो । अत इस बात को हमारे राष्ट्रीय नेताओं को अपने ध्यान में रखना चाहिए श्रौर यह परिवतंन चाहे कितना ही कठिन हो करना ही चाहिए । हाँ यह हो सकता है कि आवश्यकता के अनुसार वह धीरे- धीरे किया जाए । यदि हम चाहते हैं कि भारतीय भाषाओं में उदाहरणा्थ तमिठ् में उत्तम कोटि का बेज्ञानिक और तकनीकी वाइमय तैयार हो तो जब तक कि विचार स्पष्टता से और अच्छी तरह प्रकट न किये जाए यह काम आसान नहीं होगा और दूसरों भाषाओं को पुस्तकों के अनुवाद मात्र से काम नहीं चलेगा । जापान में अनेक नवयुवक वज्ञानिक हैं जिन्होंने अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की ऊंची योग्यता प्राप्त की है और वहाँ शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी नहीं था । इन लोगों ने अपनों मातृभाषा जापानी में हो शिक्षा पायी थी । तब हमें गम्भीरता से इसपर विचार करना चाहिए कि हम वर्तमान परिस्थिति में यह स्तर किस तरह प्राप्त कर सकते हैं । हमें याद रखना चाहिए कि महात्मा गान्धी ने इस सम्बन्ध मे कहा था-- परमात्मा के नाम पर मातृभाषा का. आश्रय लो नहीं तो हम कुछ भी नहों कर सकेंगे । और एक बात है हमारे देश में साक्षरता तेजी से बढ़ रहो है और यदि हम अपने देश का विकास जनतान्त्रिक और समाजवादी ढंग पर करना चाहते हैं तो हमे ज्ञान को सबके लिए सुलभ बनाना चाहिए




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