मलेरिया मोतिजरा का इलाज | Malereya Motijra Ka Elaj
श्रेणी : आयुर्वेद / Ayurveda

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
2.47 MB
कुल पष्ठ :
98
श्रेणी :
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No Information available about वैधाचार्य उदयलाल महात्मा - Vaedhachaarya Udaylal Mahatma
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)( ऐे४ )मनुष्य और चिकित्सक भलीमाँति समक सकता है कि
लंघन कब तोड़ना चाहिए। -साधारणतया लंवन उस समय तोड़ना चाहिए जब
बुखार उतर जाय शरीर का तापमान करीब & ८ डिगरी
हो जाप, रोगी की जीम साफ हो जाय, मुह का कड़वा
न रदे'और कुछ भूख मालूम देने लगे इन सक्णों के
उत्पन्न होने पर समभक लेना चाहिए कि शरीर अपनी
सफाई का काम पूरा कर चुका है । दोपों.का पांचन हो
चुका हैं और शरीर पुनः निमंल, स्वच्छ, विकार रहित
घन गया है । जब तक उपरोक्त लक्षण उत्पन्न न हो तब
तक अंन्न आदि कोई वस्तु बीमार को खिंलाना केरल
पखता है और रोगियों को भी चाहिए, कि अपनी झन्त-
रात्मा.की पुकार सुने और बिना भूख हरगिज कुछ न
खायें चाहे अन्न हो चाहे दवा अन्पया उन्हें बदुत पछता-
ना पड़ेगा और संभव है ये अपनी जान से भी हाथ .घो
बेठें। आँतों की सफ़ाई ब उनमें स्थित मल को निकालने
के लिए रोजाना साधारण गरम जल का एनिमा अवश्य
देना चाहिए । एनिमा दिन में एक या जरूरत पड़नें पंर
दुधारो 'भी दिया जा सकता है, परन्तु सबसे अधिक ध्यान
में रखने की बाते यह 5 कि तेज़ बुखार में .चढ़ी चुखार
में) अर्थात् जब तापमान अधिक हो उस समय एनिमा
User Reviews
Yashvi Jain
at 2022-04-22 07:41:30