हिंदी मिडिल व्याकरण | Hindi Midil Vyakaran

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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(१३ ) साथ होता दै । संस्कृत शब्दों से भाववाचक संज्ञा ससें/से _ के नियम नीचे लिखे जाते हैं । (१ )कद्दीं ९ ता का प्रयोग होता है । जैसे सुन्दर से -सुन्द्रता मित्र से भिन्रता दीन से दीनता चतुर से चतुरता । (२) क्तहीं कददीं त्वका प्रयोग होता है । जसे प्रश्ु से प्रचुत्व मनुष्य से मनुष्यत्व दास से . दासत्व । . - ं (३) कहीं कहीं थातु से भी भाववाचक संज्ञा बनती है । जैसे भज्‌ से भक्ति गम्‌ से गति पट से पठन) जि से जय । सेस्कृत में झनेक प्रकार से मावयवाचक संज्ञायें बनती हैं शोर उनका प्रयोग हिन्दी में भी होता है जैसे - पांणिडत्य साधघुय्य कौसार पौरुष गौरव पत्य-वाचक लघु-वाचक कते-वाचंक शब्द । . (१३ अपत्यवावक शब्द । नोट-अपत्य का अथ खन्तान है । . शब्द अपत्यवावक शब्द... अथे बसुदेव बाखुदेव ..... चसुदेव का पुत्र (झष्ण डी 3 पागड़ पाण्डव पाग्रटु के पुत्र ( पाँचो पाग्रडव




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