भारतीय अतीत की बातें | Bhartiya Ateet Ki Baten

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Bhartiya Ateet Ki Baten  by कालिदास - Kalidas

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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आधि पुरखें ४ मोहनजोदड़ो की वात कर चुका हूँ । इस नगर के निवासियों को हम अपने पुरखे नहीं मानते । सोहनजोदड़ो के उत्तर, पंजाब में आर्य बसे थे । आर्यों ने इन्हें जीत लिया, धीरे-धीरे एक ओर सिंध में बस गधे और दूसरी ओर उतसर-प्रदेश तथा विहार तक । फिर तो इनका प्रधुत्व भारत के सभी निवासियों ने सान लिया । इन आर्यों के नेता ऋषि कहलाते थे । हिस्दू अपने को किसी न किसी नऋषि की संतान सानते हैं। किसी हिन्दू से पुछिए, तुम्हारा पया गोत्र है ? तो कोई वातिप्ठ गोल का है, कोई कौशिक गोन्न का, कोई अंगिरस गोत्र का । थे सब आर्य च्षि थे । यों गोती वनकर हिन्दू * को ही अपने पुरखे मानते हैं ।




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