भारतीय वास्तुकला के ५००० वर्ष | Bharatiya Vastukala Ke 5000 Varsh

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Bharatiy Vastukala Ke 5ooo Varsh by अज्ञात - Unknown

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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गए न कै __ ९ १२३२ में चनवायां हुंध्ा मन्दिर (चित्र रद)... के मन्दिर नागर शंली के विकास का पूरा दुशन नेमिनाथ को समर्पित किया गया है । यद कराते हु । परशुरामेग्वर के शिव मन्दिर में मन्दिर संगमरमर के थने हुए ईं । कम़िन्स ने नीची परन्तु दाहरी छुत्त का सरडप ई जिसकी इनको देखफर कहां था-- सिन्दिर की छत दीवारें ठोस है झोर छुतत के चोच में प्रकाश स्तम्भों तोरणा क्तारो धर श्राली की चारीक .... श्वान के लिए भरोखे बने हुए द । शिखर की पच्चीकारी में सुन्दर श्रलकरण द्वारा इनमें जो... ऊंचाई के कारण लिगराज का. महान मन्दिर प्राण प्रत्तिप्ठा होती हु चह यधाथ में अनुपम (चित्र २६) श्त्यन्त प्रभावोत्पादक दिखाई द। सहज ही टटने चाला चारीक स्वच्छ पढ़ता ह। यह प्रभाव इसके सुद्ढ़ पाम्व संगमरमर की सोप के समान पालिश समस्त भागा की ग्यढी रेगाथ्ो के कारण श्र भी फला को पराभूत कर देता हे । उसके कुछ... धधघिक चढ़ जाता है । सन्‌ १९३८ घोर १२६४ नमूना में तो संन्द्य॑ स्वप्न जंसे साकार हो... के सध्य निर्मित कोण क सुन्दर सूर्य मन्दिर उठे हूँ । में घ्रार उड़ीसा के श्न्य मन्दिरो में कोई विशेष ७चों से १३चीं शताब्दी से चने हुए उढ़ीसा.... श्न्तर नहीं हु । हसकी सबसे बढ़ी विशेषता २९. डिंगराज मन्दिर मुर्सेश्वर कमलवणिवलनव फिकहला नी सा 2००४४०४१०५००५०००३४४०००७४ द के ज् | लि न कि न हर आदि न नकद क रे. न स्का अं द इ इस नव नी हर ्ँ उन नकल ग् है ्‌ डे बन कड़े के हर. धर पृ कक ् श डर कर ली. ढ ९ केन्टण हनन न श १ हा ही. 1५ न्ग हा 4 हे 24 | ह ६ न्क रन 1 है दर दे दर हि ि 111 नह जा 1 १६ है है शुसर है है ग ्ँ नाव मनिगिकद न थ् यु के क्र न 1 | १ है । पद... ही द शा का. कर चीन 71| 2६ का न रे वे है | हि कोना मी नकद कद उन... ...नयका हिसि कल लक बवाल न 1 २ हो नमी रे जे प्रम्मगा भ भ् ग् पक गा ) ) । 1 हद पं नि कर | जा कक पी की । प्रग थ घ- हैं. श प्र 3 हक ० पल पलक लगे. द न टक के... 1 लक बज नये ?वं हैं-ईन्वनि . ली ही अपर रे 3 चे। कि च 1 कि ग् 1 न पक ् की १०? लि नल | |




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