एशिया में प्रभात | Asia Me Prabhat

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Asia Me Prabhat by कल्याणसिंह शेखावत - Kalyan Singh Shekhawat

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about कल्याणसिंह शेखावत - Kalyan Singh Shekhawat

Add Infomation AboutKalyan Singh Shekhawat

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
[ १३ 1 प्रजातंत्र वास्तव में सच्चा, लाभदायक धर पवित्र है या नहीं 'प्रजातंत्र' का थे तो यद्दी, है न फि किसी देश में मनुष्य व्दों के- समाज पर मनमानी न करने पावे ? परंतु साथ दी यह भी: सोचना उतना ही 'झावश्यक है कि एक मनुष्य की तरह दुष्ट प्रकृति के अनेक मनुष्य, झपने निजी स्वार्धों की रक्षा करने के ' लिये, जन-साघारण को चकमा देकर, उनके स्वत्वों को जार या. क़लोसर से भी झधिकतर भयंफरता के साथ न कुचल डालें । क्या कई देशां के मालदार श्र स्वार्थी झाद्मी वहाँ की राष्ट्रसभाओं में घुसकर प्रजातंत्र की धूल नहीं उड़ा रहे हैं ? अमेरिका के प्रजातंत्र में कई ऐसे दोप उपस्थित हो. गए हैं, जिनके कारण: हाँ भी वास्तविक स्वतंत्रता छुप्तप्राय-सी हो गई है । सच्चा और वास्तविक प्रजातंत्र तो वह है; जिसमें. छोटे .'घौर चवड़े श्पने निजी लामों की.पूर्ति की चेष्टा को त्यागकर समंन लाभ, समानः प्रतिष्ठा और समान प्रेम के भाव में रत हो जायें । जापान को इसी प्रकार की स्वाथेशून्य एवं जगदुपकारिणी पश्रजातंत्र-सभ्यता का निर्माण करना चाहिए; ताकि बड़े लोग छोटों की और छाटे शोग बड़ों की चिंता करें, और '्ापस की थुक्ा-फृज़ीदत करने तथा एक दूसरे. के मुँह का कौर छीनने के लिये दुलबंदी न करें । यहीं जापान का धार्मिक, कत्तेव्य श्र व्यावहारिक उपदेश तथा. सच्चा संदेश होना चाहिए 1 एशिया के मिन्न-सिन्न भागों में कुछ ऐसे महामना, उदार- स्वभाव श्और देवोपम मनुष्य उत्पन्न हो चुके हैं, 'और भविष्य में: भी उाधिकतर संख्या में-होंगे,..जो बस्तुतः इंध्र. के सादात : छावतार ही होंगे । - वे समस्त . एशिया को सच्ची स्वतंत्रता, सच्ची:




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now