महात्मा शेखसादी | Mahatma Shekhsadi

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Mahatma Shekhsadi  by प्रेमचंद - Premchand
लेखक :
पुस्तक का साइज़ : 2.13 MB
कुल पृष्ठ : 93
श्रेणी :
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प्रेमचंद - Premchand

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( १९ ) के राज्य-काल में पाटलिपुत्र की जो उन्नति थी चही इस समय वग्रदाद की थी । वगदाद के वादशाह ख़लीफ़ा कहलाते थे। रोनक श्र झावादी में यह शहर शीराज्ञ से कहीं चढ़ वढ़ कर था । यहां के कई ख़लीफ़ा वड़े चिद्याप्रेमी थे । उन्होंने सेकड़ों चिद्यालय स्थापित किये थे । दूर दूर से विद्वान लोग पठन-पाठन के निमित्त झाया करते थे। यह कहने में झत्युक्ति न होगी कि युगदाद का सा उन्नत नगर उस समय संसार में नहीं था । बड़े वड़े लिम फ़ाज़िल मौलवी मुर्ला विज्ञानवेत्ता श्रौर दार्शनि- को ने जिनकी रचनायें आज भी गौरव की दृष्टि से देखी जांती हैं चुग़दाद ही के विद्यालयों में शिक्षा पाई । विशेषतः रसा निजामियां चतंमान झाक्सफोडे या वर्लिंन की युनिवर्सिटियोँ से किसी तरह कम न था । सात झाठ सहसू छात्र उसमे शिक्षालाभ करते थे। उसके अध्यापकों शोर झधिप्राताओं में ऐसे ऐसे लोग होगये है जिनके नाम पर मुसलमानों को श्ाज् भी गवं है। इस मद्रस की व॒नियाद प्फक ऐसे विद्याप्रेमी ने डाली थी जिसके शिक्षाप्रेम के सामने कारनेगी भी शायद लखित हो जायं । उसका नाम निज़ामुलमुर्कतूसी था | जलालुद्दीन सलजुकी के समय में वह राज्य का प्रधान मन्त्री था । उसने चुग़रदाद के झतिरिक्त वसरा नेशापुर इसफहान शादि नगरों में भो विद्यालय स्थापित किये थे। राज्यकोप के शझ्तिरिक्त श्पने निज के झसंख्य रुपये शिक्षोन्नति में व्यय किया करता था।




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