स्वर्ग की सड़क | Swarg Ki Sadak

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
16.31 MB
कुल पष्ठ :
568
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)दिपय सूची १ ।लक बाएं पायल पवारररावाण पा वाटवथय यासंय्या घिपय घु्
र०९-साइयो ! घर्म मोर भक्तिका काम जद्दू कीजिये !
. उसे चादेपर मत रखिये । -३११०-छाद्मी अपने मनमें जेसा विचार करता दे भागे जा-
कर बेला ही दोजाता है; किसी ओछे विचारकेसाथ घत खेलना! _ '
३११- आइमी अपने मनमें जैसा विचार फरता दे आगे जा-
कर वैसा ही दोजाता दै। (३). ८३श्१२-दाख और सेत कहते है कि सत्संगकी चढिद्दारी है ३८८
११३-सत्संगमण्डछीमें किसी सन्तके साथ रहकर भक्ति
करनेसे जितना भानन्द म्िछता दे उतना आनन्द उस
स्थान तथा उस सगके छोड़नेके याद नददीं मिलता
३९०इसका कारण ।
,. ११४-किसीने कुछ थाती रखी हो और वदद वापस ले जाय
'. .. हो इसका अफसोस नहीं करना चाहिये । ३९२
श१५-हम सबको केसे धर्मगुरुकी जरूरत है! ३९५
शरद अब दमें यह समझना सीखना चाहिये कि जिन
उच्छे कामोंले बहुत आद्मियोंकी मलाई दोंती हे थे
सब घर्मरे दी काम है। ३९८
१७-मगवानकी महिमा थे ४०१
१६८-वैराग्य दिशाकर या उराकर भक्ति करानेकी अपेक्षा
भ्रसुप्रेम चताकर तथा परमुकी महिमा समझाकर भक्ति
:£ कराना भरच्छा द्
1९ --याद-रखना कि अपनेसे काम पड़नेवाले किसी आदमी
को कोई बुरी आदत था घुश व्यसन लिला देना
ए बड़ा सारी पाप दै । -.... ४०४
०: प्रभुके झपण दजातलेक मलि कया १ ( १) ४०७
!२१ -पमुके जपेण दोजानेके माने कया ! (२)... « :डंए०
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