व्याकरण महाभाष्यम | Vyakaran Mahabhashyam

Vyakaran Mahabhashyam by विश्वनाथ विष्णु आपटे - Vishvnath Vishnu Aapate

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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मे 3 पा. १ भाडिक १ 1 व्याकरण मदाभाप्यंस श्ण जानते । सायुज्यानि जानते । छ। य एप दुर्गो मार्ग एफसम्यो वाख्विपिय । के पुनस्ते । वैयाकरणा । कुतत एतत्‌। भंद्रेपां लश्मीनिंहिताथि याचि। एपां वाचि भद्ठा लश्मीनिंडिता भवति । लरमीलैक्षणाद्वासनात्परिदृढा भवति ॥) सक्तुमिव ॥। सारस्वतीसू । याशिका पठन्ति । आडितामिरपशब्दे प्रसुज्य प्रायश्विचीयां सारस्वतीमिटिं निर्ममद्िति । मरायत्विचीया सा शूमेत्य येये ब्याकरणम्‌ ॥ सारस्वतीस 0) दूशम्यां पुत्रस्य । याशिका पठन्ति । दुशम्युत्तरकालं पुत्रस्थ जातस्य नाम विदृध्याद्धोपवदायन्तरन्तस्थमवृद्धं ्रिपुरुपानुकमनस्पितिष्टित तद्धि प्रतिष्ठिततमे गवति यक्षरं चतुरक्षरं वा नाम कृत कुर्मात तद्धितमितति । ने चानरेण व्याकरण कृतस्तदिंता वा शक्‍्या विज्ञातुमू ॥ दशम्यां पुत्रस्य ॥ हैं। इस स्थान पर अर्थात्‌ कहाँ ? यह जो डुगेम ( मोक्ष) मार्ग है कि जी केवल शानसे ही प्राप्य हे और जो वेदवाणीका विपय हे उस स्थानपर ये ल्लेही कौन हैं वैयाकरणं 1 हृदू सह कैसे संपादन करते है उत्तल-- भद्रेपां उश्मीरिहिताधिवाचि ? अर्थात उनकी वाणीमें कल्याणकारक शमी वास करती है इससे। ठक्षण किंचा भासन अर्थात्‌ प्रकाशित होना इस शुणके कारण लक्ष्मी अज्ञान दूर करनेमें समर्थ होती है इसछिए उसे लक्ष्मी कहते है । अब सारस्वतीय० बाक्यकों लें । याशिक लोग कहते ह-- जो गृद्मामिका पालन करता है वह यदि अपशब्दका प्रयोग करे तो बह प्रायाशिसके हेतु सारस्वती इष्ि करे। हमें प्रायश्विन की आवश्यकता न हो इसलिये व्याकरणका अध्ययन करना चाहिये ) अब दुशम्याँ पुमस्य वाक्यकों लें । यासिक लोग कहते हैं -- दसवें दिनंके बाद नवजात पुनका नाम रखा जाय । नामका आरंभ घोपतर्तु ब्यंजनसे हो नामंके बीच अन्तःस्थ व्यंजन हो वह बृद्ध न हो ( अर्थात्‌ उसका आरंभ जा ऐ आओ इन वाद्धिसिंशक स्वरॉसे न हो) यह तीन पुरुषोंके नामोमेंस हो और वह अनरि हो अर्थात्‌ मानवका न हो ( अर्थाद्‌ देव-आदिका हो ) अयवा शब्ुमें अतिथित सन हो। ऐसा जो नाम है दह अत्यन्त प्रतिष्ठित होता है । नामके अक्षर दो अथत्रा ९ सरस्वती देवतारो लक्ष्य करके की घानिवाठी इषटि सरस्वती कदलाती हे २५... चोमिं तीरारा चींथा और पॉवर्वों दर्ग और य र के व द इन वर्णोंको धोष कहते हैं। य र ठ व इन चार वर्गोंदो अन्त स्य कहते दैं। जिस शब्दमें रुपरॉसेंगे यदला स्वर था ऐ छिंवा थी इगमेंगे कोई एक होता हे उस शाव्दको बद कदते दैं। ( देखिये सन काकाउ 1 पुजका नामकरण करते समय पिता अपने बाप दादा भीर परदारा इन तीनॉंमेंगि फिसी एकका नाम रखे। व नाम सडुष्यसे मिन शर्थात फ्सी देवताके सयेमें हड दो गया दो गौर वद नाम शतुके छ़िए रु न डुआ हो 1




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