मुर्दों का गाँव | Murdon Ka Gaon

5 5/10 Ratings.
1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : मुर्दों का गाँव - Murdon Ka Gaon

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about धर्मवीर भारती - Dharmvir Bharati

Add Infomation AboutDharmvir Bharati

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
.नडियसंनविस्ििनिसििजिसमवभरििसदिउन्यमददससलवरसरिायीं 2-2लेदंनसलस्केकस्सवडद ददनददस्थवउडदमकससर १५ मुर्दों का गाँव चावल नहीं है. | की दे दो महाजन बड़ी सेहरबानी होगी । बनिये ने चारों ओर शंकित निगाह से देखा और बोला । ) रु० सेर मि लेंगे । उसके बाद ग़ा्ला खोला अठन्नी उसमें रखी और दूसरी अठन्नी निकाल कर बोला-- ठगने आई है बदमाश खोटी अठन्नी बोहदनी के वक्त । बेइमानी तो देखो । चार आने खेर खरीदे हुये चावल को र रु० सेर बेच कर ब्अठन्नी बदलने वाला इंसानदार बनिया बोला--अऔर खोटी च्ठन्नी उसके सामने फेंक दी । रासी गुस्से से उबल पड़ी-7 भूठा घोखेबाज़ मेरी अठन्नी तो अच्छी सननससता यु पच्छा अच्छा गाली. देती है। चोरी छोर ऊपर से. सीनाजोरी । इसी अधर्म से तो यह अकाल पढ़ रहा है बनिये का नौकर उठा और डॉट कर बोला-- उतर दूकान से और धक्का दिया तो वह मुँह के चल सीढ़ियों से नीन्े गिर पड़ी । नौकर ने खोटी अठन्नी उठां कर बचिये को दे दी और बोला-- रख लो लाला फिर किसी सौक़े पर काम आ -जायसी । ५ रििफक




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now