गांधी - गीता अथवा अहिंसा - योग | Gandhi Geeta Athwa Ahimsa Yog

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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(३)“स्वराज्य॑ सर्वेदा श्रेयः, काम दोषसमन्वितमू ।स्वाधीन॑ ससुखं चेव, परराज्यात्त सुशासितात” ॥१॥“स्व॒राज्य सदा अच्छा है, चाहे दोष युक्त भी क्यो न हो; सुशासन- युक्त विदेशी राज्य से----स्वाधीन एवं सुखपूर्ण होने के कारण” ॥१०)।इत्यात्मशासनाधारं,. सिद्धान्त विश्वसस्मतम्‌ ।श्रख्याप्य. भारतायापि, तद्थ.... युद्धमाचरत्‌ ॥११इस तरदद द्रात्म-निणंय के विश्वसम्मत सिद्धान्त को. भारतवर्ष के इसलिए भी ख्यापित करके, उन्होंने उसके लिए युद्ध करना श्रारम्भ किया ॥ ११)'झन्ये5पि वहुवः शूरास्तामेव सरखि ययुः । फिरोज़शाह. आनन्दु-चालू: श्रींशझुरस्तथा ॥१९। और भी बहुत से शूरवीर उन्हीं के मार्ग पर अनुसरण करने लगे---फिरोज शाह, झानन्दचालू' तथा श्री शझरन---१२॥ रमेशचन्द्रदत्तो वे, बौनर्जीश्वन्द्रवकेर: ) घोषो रासविह्दारीश्व, भूपेन्द्रवसुरेव च ॥१३॥। रमेशचन्द्र दत्त, बौनर्जी, चन्द्रवर्कर, रासविददारी घोष, आर भूपेन्द्रवसु ॥ १ ३॥सिन्हा मज़ुमदारशख्र; वासन्ती विदुषी तथा हसनेमाम इत्याख्या:; सर्वे5पि राष्ट्रनायका: ॥१४॥ ' सिन्हा, मजूमदार, विदुषी बासन्ती, इसन इमाम--इत्यादि सबराष्ट्रपति हुए ॥ १४)




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