हिंदी - शब्दसागर सं.२९ | Hindi Sabdhsagar No 29

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भगवानदीन - Bhagawanadeen

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रामचंद्र शुक्ल - Ramchandra Shukla

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रामचन्द्र वर्मा - Ramchandra Verma

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श्यामसुंदर दास - Shyam Sundar Das

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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|... , कर व. कि , की श कु सा... नमन वि नल ते दि दि की दि फेर दर _... थी और इसे दुर्गा जी मे मारा था । सार्कडेय पुराण में न _... क्रम से लघु और गुरु आते. न सकी सावस्तर कथा लिखी है । मेक * सहिषी-संज्ञा खी० [ सं० ] (१) मैंस । (२) रानी, विशेषतः पट- कि रानी । (ड.) सैरिश्री । (४) एक ओषधि का नाम । महीघ्रक संज्ञा पुं० [ सं+ 1 (33 सहीघ्र । (२१ एक राजा का सहिषीकंद-संज्ञा पुं० [ सं० ] एक अकार का कंद जिसे मैंसा नास | कद भा कहते है । । हि महीन “बिं० | सं+ महा + मीन ( सं८ कीण!' | की है, जिसकी मोटाई महिचीप्रिया-संज्ञापपुं० [ सं० ] झूली नामक घास या घेरा बहुत ही कम हो । “सोटा” का उच्टा । पतला । सूक्ष्म । जसे सहीन तागा, महीन तार, सहीन सुई जादि | कक (२) जिसके दोनों ओर के के बीच बहुत कम अंतर | । जा बहुत कस मोटा हो । बारीक 1 झीना । पतला । जस--महान कपड़ा, सहान काराज कहने छा | जु महिषेश-सैज्ा पुं० [ सं० ] (१) सहिषासुर । उ०८--महासोह 1विद्ाला । राम कथा कॉलिका कराला ।-->सुल्सी (२) यमराज । उ०--कह महिषेश वहाँ ठे जाओी ! चित्र गुपित्रे घाहि देखाओ ।---विश्रास । कु चर, | 1 8 दि दास समनाहर आनन बार को दीपिस जाकी दिपें सब दीवें | हिघोत्सग-संज्ञा पु फ स० एक अकार को ये । श्रौन कि विराजि र था यत साहि की ले [ सं० ] बहुत बड़ा सु है सुकुताइल सं दे समीप ।. सारी महीन सी. छीन विछोकि विचारत हैं कवि के अब- नीपें । सोदर जानि ससीही मिली सुत्त संग लिए. मनों सिंधु की सीपें ।--मनोहरदास सुद्दा०-महदान काम न वह काम जिसके करने में बहुत साब- घानी ओर आँख गड़ाने की आवश्यकता पड़ती हो । जैसे... सीना, चित्रकारी, सूची कर्म आदि । गए र-संज्ञा पुं० दे० “समहीसुर” द गे .. मही-संज्ञा खी० [ सं० 1(१) प्रथ्वी । (२५ सिट्टी (३१५ अवकादा देश, । स्थान । (४) नदी । (५) क्षेत्र का आधार । (६) सेना । (७) झुड । समूह । (८) एक की संख्या । (९) गाय । (3०) हुरहुर । हुलहुर । (११) एक छंद का नाम . जिसमें एक छथु और एक शुरु मात्रा. होती है । लैसे--- ऊच ५, गा तल हर रगी, नदी इत्यादि की दे) जो बहुत कम, 1 या तेज हो। कोसल | आस पा हद थ' स्ः पु संज्ञा पुं० [ हिं० महना ] महा । छाछ । उ०--(क) तु मा। मंद ( इस जय में यह दाव्द प्रायः दाब्द वा स्वर के लिए ही आता है 9 । संज्ञा पुं० [ सं» ] राजा । दर डक महू था पु प्‌ स० मास वा मा: मिं० पा८ मांहिं है ( न] चुका सुादत दूत भया सानहू आमय लाह मॉगत सही --तुखूसी । छाडि कनक मणि रत अमोलक काँच की किरच गही । ऐसी तू है. चतुर विचेकी पय तजि पियत सही ।--सूर । ; (ग) घ दो माखन सही बे नहीं मझ | एसी का एक पारसाण जा बच के बारहव अदा के बराबर होता है । गा चोरी करतु हैं फिरतु भोर अर साँस 1<- कुचल कु यह साधारणतथा तास दिन का होता है; पर को कोई... महीने इससे अधिक और न्यून भी होते हैं। आाजकल भारत- चष में प्रकार के महीने हैं>“देशी, अरबी और अंग्रेजों । देशी वा हिंदी महीने चार प्रकार के होते हैं, सौर मास, चद् सास, नक्षत्र सास ओर सावन मास (विवरण के . 'छिये देखो “सास”) अरबी महीना एक का चंद स ्स _ है जो झुक द्वितीया से होता है । अँग्रेजी सहीना सार मास का एक भेद है जिसमें संक्रांति से महीना न टी . बदलता, कितु अत्येक महीने के दिन नियत होते हैं। जो कार, अचालत वा. चांद बच में, उसे सौर वर्ष के बराबर महीकित-संक्ञा पुं० [ सं० ] राजा रा .. मददीखड़ी-संज्ञा खी० [ देश० ] सिकलीगरों का. एक. औौजार जे जिसकी धार कुंद होती है और जिसमें लकड़ी का दस्ता छगा रहता है । इससे बतेन आदि खुरचकर साफ किए |. डर जाते हैं और उन पर जिला की जाती है । कक मंदीज-संज्ञा पुं० [ सं० | (१) अदरक । आदी । (२) मंगल ग्रह । यह इतरा. नामक दासी के युन्न थे । .... करने के लिये जोड़ा जाता है, उसे लौंद कहते हैं; और यदि यह काठ एक महीने का होता है, तो उसे; ढौंद का. है कु . महीना था मल मास कहते हैं ( देखो “मल मास है .... देशी वर्षों सें अति तीसरे वर्ष सछ मास होता है. और उस सम सम ४ की समय बष मे बारह महीने न होकर तेरह महीने. होसे हैं। + . वर्षो में अति चौथे बे लौंद का एक दिन अधिक ..... बढ़ाया जाता है; पर अरबी सहीनों के वर्षों में सौर ब्ष से




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