कांग्रेस का इतिहास खंड 2 | Kaangres Kaa Itihaas Khnda 2

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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११ बच्चा-सभी के बारे में होता दैं। मनुष्य ऐसा प्राणी दे जिसका निर्माण मनोविज्ञान के द्वारा ददोता ह--चादे उसे श्रात्मा कद लीजिए या श्रौर कुछ । चुड़ांत श्राध्यात्मिक तसव के बारे में जो बात दमें कवियों श्रीर लेखकों ने श्राम श्नुभव श्रोर भत्रिप्यवाणी के रूप में सिखायी दें इतिद्ास- कार उसकी उपेक्षा नहीं कर सकता । श्रोर सब से पहले इमें यह जान लेना चाहिए कि जीवन की विजय श्ौर दुःखद घटनाध्रों का श्रर्थ पात्र-विशेष पर निर्भर करता हैं श्लौर एक छोटे-से परिवार में दी एसे कितने द्वी प्रकार के मनोवेज्ञानिक विभिन्नताश्यों के नमूने मिलते हें । दमारे पूर्वजों ने इनमें से चार को लिखा था--ुरक्त प्रकृति या श्रात्माभिमानी उप्णु प्रकृति या चिड़चिड़ उदासंन स्वभाव के श्र मन्दप्रकृति या भोतने । श्राघुनिक विश्लेपण के श्नुसार मनुष्य के दो ही प्रझार हेँ--एक बहिमुखी प्रकृति का श्रोर दूसरा अन्तमुर्ख। प्रकृति का । इनके श्रतिरिष चार वर्गीकरण श्तर हैं जिनका आाघार हे--विचार-शसि भावना अनुसूति और श्टसरण । यूरोप के उन सुपरिचित मनोवेज्ञानिक श्रौर देंद्दिक नमूने का सादश्य हमें श्रक्रीका में सिल्ता है । काका रंग नीग्ों मुख-मुद्रा झोग झन्य जातीय चाल-च्लन तो श्वरणमात्र है । इसके मीतर रसख-वादिका नक्िकाद्ं से होन मांसपश। वाले स्नायविक निर्माण वाल अन्तमभुक्त मनावंज्ञानिक श्राघार वाले विभेद एस हैं जो मानव-जाति की विभिन्नताओं के नमूने के रूप में श्र्रीका में भी देखने में श्राते हूँ श्रर यूरोप में भी । श्रक्सर दुनिया में जो लड़ाइयां हुई दें उनमें शस्त्रास्त्रों ब्यौर साज-सरंजामों की उत्कू्टता को ही सब से ऊ चा महत्व प्राप्त हुआ दे। एक इतिहासकार ने कहा है कि मेंसोडोनिया के भालों की बदौलत यूनान की संस्कृति एशिया में पहुँची है श्रौर स्पेन की तज़वार ने रोम को दस योग्य बनाया था कि वह आजकल की दुनिया को श्रपनी परम्परा प्रदान कर सका दे। इसी तरद 1१९४४ में जर्मनी के उडानिवाले ब्मों द्वारा लड़ाई का पत्नड़ा ही पलट जानेवाला था पर वह व्यथ दो गया | तो भी तथ्य यह दे कि यूरोप के युद्ध-कोंशल के श्रतिरिक्त युद्ध में काम देने वाली शोर शक्तियां भी होती दे जिनका वर्णन बेकन ने इस प्रकार किया दै-- शारी रिक बल श्र मानव- मस्तिपक का फ्रोलाद चतुर्ता साइस ट्टता दृढ़ निश्चय स्वभाव और श्रम । इस बात के बचजूद कि बेकन एक .दार्शनक श्रौर वज्ञानिक था व सामान्य वुद्धि के स्तर से श्रधिक ऊँ चा नहीं उठ सका अर जहां वदद उठा वहां वह साइस से बदकर भोर गुणों की करपना सदी कर सका । हिन्दुत्तान में हमने सामान्य स्तर से ऊपर उठकर सत्य श्र भद्धिसा के लिए कष्ट सहन करते हुए लड़ाई जारी रखी दै अर इस तरद दम सत्पाग्रद की जिस उँचाई पर पहुँचे दे । उससे निस्सन्देह इतिहास का रूप बदल गया है आर शक्ति और श्रघिकार सत्य श्रौर भूठ दिंसा ्रर श्र्टिंसा तथा पश-बल एवं श्रारम-बल्त के संघर्ष में विजय की सम्भावना भी परिवर्तित दो गई दें । जिस युद्ध को संसार का दूसरा मदायुद्ध कहा जाता हें उसका श्रीगसुश किसी ऊॉने सिद्धांत को लेकर नहीं दुश्रा था श्रोर पटलाॉटिक का समभाता--जो एक साल बाद हुआ था टीका-टिप्पणी के बाद भी दिस्दुस्तान श्रार जर्मनी के लिए एक जेंसा किसी पर भी लागू न द्दोनेवानना होगा । उससे बीसवीं सदी के आरम्भिक चालीस वर्षो के युद्ध-नायकों का अ्रसक्षी रूप प्रकट हो गया । श्रोर उस पर भी तुररा यह कि. यद्द युद्ध एक सवंप्राद्दी युद्ध बन गया जिसने खुलने रूप में एकाधिकार के द्वारा श्रौर मनमाने ढंग से--श्रायोजित रूप में जनता की सेनिक भर्ती करके युद्ध-संचालन किया. श्रौर श्राज्ञादी तथा प्रजातन्त्र की सभी ऊँची बात दवा भाप श्रौर सुन्दर वाक्यालंकार की तरदद उड़ गई । जब कष्ट-




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