ज्ञान थापने की विधि | Shree Gyanthapne Ki Vidhi

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Shree Gyanthapne Ki Vidhi by विजयानंद सूरि-Vijayanand Suri

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about विजयानंद सूरि-Vijayanand Suri

Add Infomation AboutVijayanand Suri

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
(५) सशणनरं० ॥ विनय स॒गोचार आदरेरे लाल । जिहां साघुतणो आचार रे ॥ सु- गणनर० ॥ २॥ बलि० ॥ सुयखन्ध दोय छे जेहनारे लाल । प्रवर अध्ययन पच- वीस रे ॥ सुगण* ॥ उद्दू शादिक जाणी ये रे लाल । पंच्यासी सुजगी सरे ॥ सुग* ३ बलि० ॥ हेते जुगत करी सोभतारे लाठ। पद अट्औारे मझ्ाररे ॥ सुग० ॥ अध्र पदंने छेहड़ेरे लाल । संख्याता श्रीकार रे। सुंग० ॥9॥ बलि* ॥ गया अनंता जेह मारेलाल। वली अनन्त पयांय रे ॥ सुग० ॥ न्रसपरित- तोछे इहांरे लाल । धावर अनन्त कहायरे । सुग० ॥ ४५ ॥ बलि० ॥ निषध निक्ाचित सासता रे लाल । जिन परणित ए भावरे॥। सुग०॥ सुणता-आतम उल्लुसे रे लाल । प्रगदे




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now