सिंघी जैन ग्रन्थमाला भाग - 1 | Singhi Jain Granthamala Bhag -1

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Singhi Jain Granthamala Bhag -1  by मुनि जिनविजय - Muni Jinvijay

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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१. म्लेच्छपतिना सदद मत्रिणो मेत्री १०३ अनुपमाया ओदायेवर्णनसू «-...... १०४ वीरघवल-लवणप्रसादयो। पश्च- ग्रामसडमवर्णनम . .. १०४ अनुपमाया मरणे तेजःपालस्य शोकबतमू ... १०५ चस्तुपालस्य सत्युदत्तम्‌ . . . १०५ पश्चम: घ्रकादा: ॥ प्रकी णेकप्रबन्धः १०६-१२८ विक्रमपात्रपरीक्षाप्रबन्धः १०७ नन्दप्रबन्धः १०७ मछवादिप्रबन्घः इक करर १०७ शिलादित्योत्पत्ति-रज्ञोत्पत्ति-बल- भी भड़ प्रबन्ध कक - कर १०८ पु्नराज-तत्पुत्री श्रीमा ता प्रबन्ध: २१० गोवद्धननूपप्रबन्ध। -.... ... १११ पुण्यसारप्रबन्धः / ००... ०» १११ कर्मसारप्रबन्घः . . - ११२ ६-2 कि. ५... ने र थ <ेड्ट >> ५: श्र लक्ष्मणसेन-उमापतिधरयोः प्रबन्धः.. ११३ जयचन्द्रप्रबन्थ! दर ११४ तुन्ञसुभटप्रचन्घः २९७ परमर्दि-जगदव-एथ्वीपतीनां प्रबन्धः... ११८ कोझ्णोत्पत्तिप्रबन्ध। « . « ११८ वरादमिद्रिप्रबन्घः ११९ नागाजुनोत्पत्ति-स्तम्भनकती थीव- तारप्रबन्ध! . . « १२० मठेदरि-उत्पत्तिप्रबन्धः « . « १२१ वेद्यवारभटप्रबन्ध: १२२ सेत्राधिपोत्पत्तिप्रबन्धः . . १२३ वासनापध्रबन्ध «० « श्२३ कपाणिकाप्रबन्धः १२३ जिनपूजायां घनदप्रबन्ध! २२४ ग्रन्थकारस्य प्रदयास्तिः १२५ परिदिष्टम--कुमारपालस्य अहिं- साया विवाहसम्बन्घप्रबन्धः १ २६-२१ २८ प्रबन्धचिन्तामणे: पाजुक्रमणिका ... १२९-१३६




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