रामगीतामाहात्म्यम | Ramgeetamahatmym

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Book Image : रामगीतामाहात्म्यम - Ramgeetamahatmym

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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टीकाबयसंवछिता । ् हुए चिदयनैमित्तिक कम्मॉको शाख्रोक्त (शासोंमें कही हुई) विधिसे आचरण करे और अन्त/करणको शुद्ध करके वद्में करे तथा क््मी- जु्टानपूवेक इन्द्रियनिमरह्द आदि साधनोंको धारण करे. इस प्रकार: दोनों साधनोंके सिद्ध होनेके अनन्तर कस्सीजुष्ठानका त्याग करके आत्मज्ञानकी माप्तिके हेतु जो 'तत्त्वसखि” आदि महावाक्य हैं तिनके अथेका विचार करनेके निमित्त वेदवेत्ता और न्न्मनिष्ठ शुरुका सेवन करे ॥ ७ ॥। क्रिया दारीरोद्धवहेतुरादता प्रियाउश्रियो तो भवतः सुरागिणः । धर्मेंतरो तत्र पुनः झारीरक पुनः क्रिया चक्कवदीयते मवः ॥ ८ ॥ पदु०-क्रिया, दारीरोद्धचदेतु, आता, प्रिया- प्रियौ, तौ; 'लवत!, खुरागिणः, धर्मेतरो, तन, पुनः, चारीरकस, पुनः; क्रिया, चक्रचत्‌, इंयेले; सच 0 ८ अ० प०- ( आइता ) आदरपूदेक सम्पादन करी हुईं । ( क्रिया) क्रिया । ( चरीरोज्वहेतु+ ) दारीरकी उत्तपत्तिका कारण होती है । ( तत्र+ ) ' तिस जन्ममें ।, ( सुरागिणः ) विषयोंके चिपे आीति करनेवाउोँको । (तो) वे (धर्मेतरो) घर्म और अधर्म्म । ( म्रियाप्रियो ) सुख और दुःख देनेवाले । ( सब- तः ) होते हैं । ( तत्र ) तहाँ.। ( पुनः) फिर । ( शारीरकम्‌) आरीर । ( पुनः ) फिर । ( क्रिया ) क्रिया । (एवमूत-) इस- प्रकार । ( भवः ) संसार । ( चक्रवत्‌ ) चक्रकी समान | ( इंय्यते ) कहा जाता है ॥ ८ ॥




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