बिहार एक ऐतिहासिक दिग्दर्शन | Bihar Ek Aitihasik Digdrshan

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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चौदहवाँ अंघ्याय - पंठान-साम्राज्य का''उदय और जस्त:(,१५१८--१५७६ ई० ) विहार के लोहानी अफगान ; चागर ; समुगछों की तीन पूर्वी नचढ़ाइयाँ, झोर खाँ का उदय; झेर--विहार का बेताज सुल्तान; झेर खाँ का वंगाल-तिरहुत्त जीतना ; हुमार्यू की बज्ञाल-चढ़ाई ; गोड की गद्दी पर शेरशाह; शेरशाह--उत्तर भारत का सम्नाद; शेरशाद की शासन-व्यवस्था ; सछीमशाह; अदाली ; हुमारयूँ की वापसी औरः सत्यु; हेमू; सुलेमान कर्रानी ; उड़ीसा का पतन ;' अकबर का विहार-विजय । « २१९-२७७ पन्‍्द्रदचाँ अध्याय ' सुगरू-साम्राज्य का सम्द्धि-युग ( १५७६-१७२० ई० ) विहार का सूवा ; कठमसुछों का दिद्रोह; राजा सानसिंद; झारखंड और पठामू; यूरोपियन व्यापारी; 'गुरुगोविन्द््सिहद ; अजीमुश्दान और सुर्शिदकुली खौँ ; फररुखसियर । २५५-२७० : सोलद्चाँ अध्याय ' मराठे और अंग्रेज ( १७२०-१७६६ ई० ) .. राजनीति का केन्द्र दिल्ली से पूना जाना; अलीवर्दी खौँ ; मराठों की पहली चढ़ाई ; रघुजी भोंसढे और वालाजीराव पेशवा ; रघुजी की दूसरी चढ़ाई; मराठों का बंगाल-बिहार की सौथ पाना डर , माँसीसी,'और अफगान-आतंक ; मराठा-दरवार की दिवादिया १४




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