जैन शिलालेख संग्रह भाग 2 | Jain Shilalekha Sangrah Bhag 2
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
6 MB
कुल पष्ठ :
207
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)चैकुण्ठगुफाका लेख श्र
+9 9 छैडे ««« ««« खारवेठका राज्यामिषेक
9 प्रैछेरे ««« ««»« सुषिक-नगरपर आक्रमण
3 १९९. ८ ««« राष्ट्रिकों और भोजकोंका
पराजय
१9 ६७. «०० ««» राजसूय-यज्ञ
से पद ००० ««»« संगधपर प्रथम बार आक्रमण
9 $६१ ««« «+«« उत्तरापथ और मगधघपर,
आक्रमण, पाण्डवराजसे
अदेय ( नजराने ) की प्राप्ति
ध 9६०. ««« -«« शिलालेखकी तिंथि ही
डे
वेकुण्ठ ( स्वगेपुरी ) गुफा उद्यणगिरि--प्राकऊुत ।
[ रूगमग 9१६७४ मौयैकारू ]
अरहन्तपसादने कठिंग***'य***'नान॑ छोनकाडत रजिनोउस ”**
हेथिसहसे पनोतसय'”''कठिंग'' वेठस अगमहि पिडकाड
[ इस दिलालेखसें भहन्तोंकी कृपाको प्राप्त गुहानिर्माण ( छह०&ए8-
भ०७ ) बताया गया है । इस छेखका शेषभाग इतना टूटा हुआ है कि
चह पढ़नेसें नहीं जासकता । वेकुण्ठ शुफा, जिसके नामसे यह दछिठालेख
श्रसिद्ध है, राजा लखाकके द्वारा अन्तों और करिंगके श्रमणोंके लाभ
था उपयोगके छिये बनाई गई थी । 1]
[ग्&88, एप, फ. 1014]
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सथुरा--माकृत ।
[ बिना काठनिर्देशका ] लेकिन करीब ३५० है० पूर्वका [ चूलदर ]-
१ पितकड़ 1 व है 335. ऋणें शा. 0. 1074.
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