मोक्षमार्ग - प्रकाशक | Mokshamarg Prakashak

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Mokshamarg Prakashak  by पण्डितप्रवर श्री टोडरमल जी - Panditapravar Shri Todarmal Ji

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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।। श्रीवीतरागाय नमः ।। पा आशीर्वाद / अभ्रिमत / अनुशंसा / प्रतिक्रिया फ 0 आचार्य विमलसागरनी महाराज आपने मोक्षमार्ग-प्रकाशक ग्रन्थ में मुख्य विषयों का स्पष्टीकरण करके एक महानु कार्य किया है। इसी प्रकार आगे भी ग्रन्थों का सम्पादन आदि कार्य करके जिनवाणी का माहात्म्य बढ़ावें, यही हमारा आशीर्वाद है। (3 आचार्य बर्धमानसागरजी महाराज मोक्षमार्ग-प्रकाशक के नवीन संस्करण की प्रति प्राप्त हुई। इसमें ग्रन्थकार द्वारा स्पष्ट विवेचना के अभाव में आशंकित भूलों की ओर आपने ध्यान दिलाने का सम्यक्‌ पुरुषार्थ किया है। मात्र इतना ही नहीं, उन स्थलों का सटीक समाधान भी 'विशेष' में आगम ग्रन्थों का प्रमाण देकर किया है। धवलादि सिद्धान्तग्रन्थों के तलस्पर्शी अध्ययन का प्रचुर उपयोग करके वांछित स्थलों का सम्यक्‌ स्पष्टीकरण भी किया है। आपके द्वारा यह अत्यन्त महत्त्वपूर्ण कार्य हुआ है। इस महनीय जिनवाणी-सेवा के लिए सम्पादकों को अनेकशः आशीर्वाद । (] आचार्य आर्यनन्दीजी महाराज मोक्षमार्ग-प्रकाशक का नवीन संस्करण पढ़कर अत्यन्त आत्मीय हर्ष हुआ । इस ग्रन्थ का स्वाध्याय करने में आपने महानू ग्रन्थों के प्रमाण देते हुए सूक्ष्म विषयों को स्पष्ट किया अतः विशेष ज्ञानवृद्धि में सुगमता हुई । आपने छान-बीन करके जो-जो विषय स्पष्ट किये वे सहज सुगमता से ज्ञान होने में सहायक होते है, यह आपने मुमुझ्नु भव्यों का बड़ा उपकार किया है, एतदर्थ आप धन्यवाद के पात्र हैं । जिनवाणी माता की ऐसी ही सेवा आपसे होती रहे - यही मंगल आशीर्वाद । (0 आचार्य सुमतिसागर जी महाराज मोक्षमार्ग-प्रकाशक के प्रस्तुत सम्पादन को देखा । यह शुद्ध और पटठनीय है। इसी पर हमें बड़ा गौरव है कि जो हमारे मुनिधर्म की प्राचीन प्रणाली को आगे बढ़ाते हुए नई पीढ़ी को पुनः गुरुशिक्षा का ज्ञान देकर जीवन समृद्ध बना रहे हैं, वह दिन-प्रतिदिन बढ़ती रहे; यही हमारा अन्तःआशीर्वाद है। (] आचार्य सम्भचसागर नी महाराज निश्चयव्यवहार समन्वित विशेषाधों से युक्त श्रेष्ठ सम्पादन के लिए शुभाशी: ।




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