हिंदी शेक्सपियर भाग दो | Hindi Shakespeare Vol 2

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Hindi  Shakespear  Vol 2 by गंगाप्रसाद

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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९ ३ कि देक्सपियर नाट्य करने में बहुत दक्ष है। इसो प्रकार अन्य लोागें ने भी उसकी बहुत ही प्रशंसा की है । जब शेक्सपियर ने रडु-भूमि में काम करना आरम्भ किया उस समय अच्छे अच्छे नाटक उपस्थित न थे । इसलिए पहले पहल दोक्सपियर दूसरों के नाटकेां का काट छाँट कर ठीक कर लिया करता था । फिर वहद्द स्वय भी काव्य रचने कगा । सन्‌ १५४३ ई० में उसका पहला ग्रन्थ ४८0४ काले ते०ां५ बैनिस ग्रीर अडोनिस निकला जिसमें उसने एक प्राचीन प्रेस कहानो के छन्दोबद्ध किया था । इसके पश्घात्‌ .0८८८० लछुक्नसी की बारी आई ये देानेां अ्रन्थ यद्यपि प्रारम्मिक दूष्या के हैं शरीर इसलिए सर्वोपारि उत्तम नहां परन्तु कवि की येग्यता की भऋलक इनमें भी स्पप्टतया दिखाई पड़ती है । इन ग्रन्थों के रचने पर कवि की प्रशंसा इतनी हुई कि थोड़े दिनेां में उसका सम्बन्ध कई नाटक-सभाओं से हे गया। उसने इन में दिस्से ले लिये ग्लौर कुछ सम्पत्ति भी इकट्ठी करली । इस समय से अन्त तक वह नाटक लिखने में ठगा रहा । हर साल दे पएक नाटक लिख्र लिये जाते थे। १५८६ से श्५९६ तक वह प्रायः लण्डन में ही रहता था । सन्‌ १५९६ में बदद अपने गाँव स्ट्रेटफेड के चला गया । शेक्सपियर की अनुपस्थिति में उसकी स्त्री बार उसका पिता जान देने बड़े कट्ट से जीवन व्यतीत करते रहे । कहते हैं कि उसकी ख््री ने अपने गड़रिये विटिकूटन से १५९५ में वालीस शिलिकू उधार छिये थे जा सन्‌ १६०१ तक अदा नहीं हा सके ।




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