सेवाधर्म और सेवामर्ग | Sevadham Aur Seva Marg

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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सेवकों की शिक्षा २३ समाज-सेवा के कार्य के ऊपर जो नमूने दिये गये हैं, उनसे पाठक यह भी समक गये होंगे कि इस काये से समाज-सेवक अपनी जीविका का प्रश्न भी हल कर सकते हैं। जिस प्रकार लोग जेल-विभाग वर्गैर: में महीनों और वर्षों मुक्त एप्रैन्टिसी करते रहते हैं, उस प्रकार यदि समाज-सेवा के काये की व्यावह्दा- रिक शिक्षा लेने के लिए कुछ समय दें, तो अपनी आत्मिक उन्नति के साथ-साथ आजीवन समाज-सेवा करते रहने के लिये जीविका का प्रबन्ध भी कर सकते हैं और इस प्रकार अपना इदलोक और परलोक सम्हाल सकते हैं। प्रत्येक संस्था को योग्य प्रचारकों की, भजनीकों की, संगठन कत्तांओं और संचालकों की, क्लर्कों और सन्त्रियों की आवश्यकता है । अनेक लोक-सेवी कार्यकत्ता इन बातों की दक्षता प्राप्त कर के आजीवन अपना तथा झपने परिवार का भरण-पोषण करते हुए समाज-सेवा का पवित्र कायें कर सकते हैं । कि यद्यपि पाश्चात्य देशों सें भी सेवकों की शिक्षा का काम पहले गैर-सरकारी व्यक्तियों और संस्थाओं ने ही शुरू किया, परन्तु इज्जलेरड के विश्वविद्यालयों ने उसे शीघ्र ही अपना लिया | वास्तव में नये ढज्ञ से सेवा-काय के सब्चालन और सड्ञठन में वहाँ के विश्वविद्यालयों ने प्रमुख भाग लिया और इस सम्बन्ध में जितने मुख्य आन्दोलन वहाँ हुए, वे अधिकतर विश्वविद्यालय के लोक-सेवी तथा उदारमना स्त्री-पुरुषों की आर से ही उठाये गये । रौर-सरकारी व्यक्तियों में सब से पहले साउथवक की वोमेन्स यूनीवर्सिटी सैटिलमेरट ने सेवकों की शिक्षा का काय शुरू किया। इस सेटिलमेरट की स्थापना आक्सफोडे तथा कैस्ब्रि के वोमेन्स कालेजों ( स्त्रियों के कालेजों ) ने की थी। पीछे से लन्दन




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