शतपथ ब्राह्मण हिन्दी विज्ञान भाष्य | Shatpathbhrahmana Hindiviganbhashya

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutMotilal Sharma Bhardwaj
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
266 MB
कुल पष्ठ :
554
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about मोतीलाल शर्मा भारद्वाज - Motilal Sharma Bhardwaj
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)इस अवस्था में उदय फभेफंगा रद को सा सा इनार्सपसे वोध नहीं होत। । इसलिए इस अवस्था का छुचारुरुप से
. इस सच्चालन करने के लिए किसी श्रमिभावक की अपेक्षा होती है । दुभाग्य
से यदि यह अवस्था बालक बिना नियन्त्रण के निकाल देता है तो वह
भ्रागे जाकर सवेधा लक्ष्पच्युत हो जत्ता है । इस लिए मातापिता का यह
. झवायक कततव्य है कि जब तक वाभक १६ वर्ष का न होजाय तंत्र तक ही
लालनादूवहवां दोषास्ताड़नादू बहवा गुण
अतः शिष्य च पुत्रं च ताइयेन्नतु लालयेत् ॥इस सिद्धान्त को लक्ष्य में रखेत हुए बालक के ऊपर मधुर शासनकरे अनुचित स्नेह के वशी भूत होकर जो माता पिता बालक की उपयुक्त
._ अवस्था म उपेत्ता कर देते हे--भाग जाकर वह बालक माधुवयस्क होता.
हुआ सर्वथा उच्छूंखस एवं अमयीदित बनता हुआ मात पिता के पृ्ापश्चात्ताप॑
को कारण बनजाता दै, जिसका | के प्रस देप्रयेक घर बन रहा है । बतलाना इसभाव मधान ही रहता है। सोलह वर्ष तक समझा (बुद्धि) भाती नहीं; समझ नहीं; _
तो छुतरां नासमक्री ( भ्ज्ञान ) का प्रमुत्व सिद्ध हो जाता है! अज्ञान से बढ़े
कर और मबल असर कौन होगा । इसी आधार पर हम कह सकते हैं कि.
. झात्ममजापति के दायभाग रूप इस शरीर पर 1६ वर्ष तक असुरों का ही.
User Reviews
No Reviews | Add Yours...