प्राथमिक स्तर पर विभिन्न प्रकार के विदद्यालयों के अध्यापकों के मूल्यों का तुलनात्मक अध्ययन | Prathmik Star Par Vibhinn Prakar Ke Viddyalayon Ke Addhyapakon Ke Mulyon Ka Tulnatmak Adhyayn

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Prathmik Star Par Vibhinn Prakar Ke Viddyalayon Ke Addhyapakon Ke Mulyon Ka Tulnatmak Adhyayn  by संध्या सिंह - Sandhya Singh

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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10) 1 प्रथम अध्याय प्रस्तावना परिचय : हमारे समक्ष जो द्रश्य सांसारिक प्रपंच का है। उसमें ज्ञान का वास्तविक रूप है? मानवीय व्यवहार में अच्छा कया है बुरा कया है कया स्वीकार्य है तथा कया त्याज्य हैं? ये प्रश्न मानव की जिज्ञासा तथा अन्वेषण का केन्द्र बिन्दु रहे हैं। इन प्रश्नों के सम्यक्‌ एवं सर्वमान्य उत्तर की खोज में मनुष्य कभी-कभी परस्पर विरोधी निष्कर्ष पर भी पहुँचा है क्योंकि ये प्रश्न इतने जटिल एवं दुरूह हैं कि अनन्त समय से मनुष्य इसकी गुत्थी सुलझाने में अनवरत रूप से संलग्न रहा है और पता नहीं आगे आने वाले कितने समय तक मनुष्य को जिज्ञासु बनाये रहेंगे तथा उनकी क्षमताओं के समक्ष चुनौती बने रहेंगे जीवन और जगत की उत्पत्ति एवं प्रकृति ज्ञान के वास्तविक स्वरूप तथा मूल्य विषयक मौलिक प्रश्नों के सन्दर्भ में विभिन्‍न मान्यताओं और विश्वासों के ढ़ाचे को ही सामान्य भाषा में मूल्य कहा जाता है। मूल्य, या यों कहा जाये कि मनुष्य के सम्मुख सबसे बड़ी कठिनाई यह है कि उसे स्वयं अपनी प्रकृति की व्याख्या करनी है, स्वयं को परिभाषित करना है। मनुष्य के अध्ययन का क्षेत्र स्वयं मनुष्य ही है। वह ज्ञाता भी है और ज्ञेय भी। मनुष्य के ज्ञाता और ज्ञेय के कारण ही उसकी नियति और प्रकृति विषयक परिभाषा या मूल की व्याख्या जटिल है। मूल्य से तात्पर्य किसी वस्तु के अन्तर्गत विद्यमान गुणों से है जो उसको किसी दे वस्तु से भिन्न दर्शाते हैं। मूल्य वह गुण सतुस्गस है जो किसी वस्तु विशेष में निहित होते हैं तथा वस्तु उस गुण समुच्चय से विशिष्टता के आधार पर परिभाषित की जायेगी। . जैसे अग्नि का मूल्य है उष्णता तथा जल का गुण धर्म है शीतलता। )




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