महादेव गोविन्द रानाडे | Mahadev Govind Ranade

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Mahadev Govind Ranade  by रामचन्द्र वर्मा - Ramchandra Verma

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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(३)राव साहब के चरफों से सी य वैठब्तर देशद्विंत छी शिक्षा ग्रहण करने का. झुवसर प्रप्प्त हुआ है, शौर पुन्नवत्‌ प्रेनभूवेंक, जिन लोगों के लिए, छापने सादंजलिक प्ताय्यर का सागें सुगस कर दिया है उन्हों लोगों के सिर पर यह पतिन्न चत्तरदायित्व है । श्र उन लोगों को श्धि- कार है कि जिस प्रकार चाहें, इस उत्तरदायित्व से उक्ण हों । राव साइब के लोकोत्तर गुणों से कारण, उनकी जीवच का सावेज्तलिक भाग जिस प्रकार महत्वपूर्ण और चिरस्नरणीय हुआ है, उसी प्रकार उन के साटिविक् स्वभाव के कारण, चन का घर झायुष्पक्रम (प8एए07) भी सनोहर शौर बोधघप्रद हुआ है। उसी घरऊ श्ायुष्य- क्रम का चित्र, श्रीमती रानाड़े ने इस पुस्तक में प्रद- रित किया है ।साथ ही साथ इस पुस्तक में राव साहब दो सावंजनिक 'चरित्र का सी थोड़ा बहुत शंश शागया है ३ राव साइव देश-क्ाय्य में (दिन रात इतने शथिक सम रहते थे कि उन के घरऊ विचारों श्र व्यवहारों में भी सार्वजनिक कार्ययो' का समावेश हो ही जाता था १ परन्तु श्रीसती राचाडे की इस पुस्तक का चद्देश्य, राव साइन के सादंजनिक कार्य्यों' का चहलेख करना नहीं है, बल्कि उनके झायुष्यक्रम का साधारण चित्र, से साधा-क




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