मणिभद्र | Manibhadra

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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बलरखेड़ा तीर्थाशिफति श्री आदीश्यर भगवान का लव-निर्मिति गर्भगुह में एालेडा माह्लौत्सान १2 9.4क.99) रे नर न ही नि जिया च्रसइण इरल्पट पिला दथ पप न मनन असाड न सपयाय ही नस देने उनप्ी-नातसरून & 2... क हर कि ता पु प री ही गट्ट दा हू कक «मर कम से सुई हि ना ना 7 मु डे रे ? हद पे शी प्रवेशोपरान्त विराजित 1 भगवान न ई श्री आदीनाथ स्वामी श्र ह थी कह, | ही कि आचार्य भगवन्त, मुनिवर्य श्री मणिप्रभ विजय जी, महत्त्तरा साध्वीजी आदि साध्वीवृन्द एवं प्रवेश कराने के लाभार्थी श्री मीठालालजी कुहाड | जीर्णोद्धारान्तर्गत जिनालय का 29.4.99 का चित्र ।




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