मिना | Mina

5 5/10 Ratings.
1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
शेयर जरूर करें
Mina by डॉ मंगलदेव शास्त्री - Dr Mangal Shashtri
लेखक :
पुस्तक का साइज़ :
4 MB
कुल पृष्ठ :
218
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |

यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटी है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं |

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

डॉ मंगलदेव शास्त्री - Dr Mangal Shashtri के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है | जानकारी जोड़ें |

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(देखने के लिए क्लिक करें | click to expand)
( ७. ]) इन्हीं दिनो लेसिंग कुछ नाटकों की रूपरेखा तैयार करन में और उन्हें पृणरूप देने से भो परिश्रम करता रहा था । इस समयके पूरे लिखे हुए उसके नाटकों में से कुछ के नाम दम नीचे देते हैं ।( ₹) यहूदी” (016 तुणठ७ा 2 । इस नाटक मे यहूदियों के विरुद्ध जो लोकमत था उसे दूर करने का प्रयल्न किया दे |(२) 'स्वतन्त्र-बिचारक” (067 768 । इसमें एक स्वतन्त्र विचार का मनुष्य, जिसे धर्म 'और धर्म-पुरोहितो से बड़ी घृणा थी, एक इंसाई पादरी की दया और त्याग के भावों को देखकर अपनी भूल स्तरीकार करता है ।इसके अतिरिक्त, कुद ऐसे भी नाटक थे जो रूपरेखा की अवस्था मे हो रहे और कभो पृणणता को प्राप्त नही हुए ।लाइष्ज्षिक को तरद बलिन में भी लेसिंग प्रसिद्ध साहित्यिक की संगति से रहता था। इस प्रकार बद्द प्रसिद्ध फ्रॉसीसी साहित्यिक वाल्टेयर ( ४0०168/6 ) से, जिसका उन दिनों राज- दरबार से बड़ा सम्मान था, परिचित हो गया । इसके छाश्रय में लेसिंग ने अनुवाद आदि का काम भी किया ! पर दोनो में कुछ दी दिनो में बिगाइ हो गया । जैसा कि आगे चलकर स्पष्ट हो जायगा, इस विरोध का लेसिंग के जीवन पर बड़ा भयानक प्रभाव पढ़ा ।




  • User Reviews

    अभी इस पुस्तक का कोई भी Review उपलब्ध नहीं है | कृपया अपना Review दें |

    अपना Review देने के लिए लॉग इन करें |
    आप फेसबुक, गूगल प्लस अथवा ट्विटर के साथ लॉग इन कर सकते हैं | लॉग इन करने के लिए निम्न में से किसी भी आइकॉन पर क्लिक करें :