ज्ञानगंगा | Gyanganga

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Gyanganga by नारायण प्रसाद जैन - Narayan Prasad Jain
लेखक :
पुस्तक का साइज़ :
30 MB
कुल पृष्ठ :
790
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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ज्ञानगंगाक्या राजनेता, क्या सिपाही, क्या वनिया, क्या कारीगर,-- सभीके कामका खज़ाना है. लड़का पढ़ने लगे तो हरज़ नहीं, लड़की पढ़ने लगे. तो हरज नहीं. समसमे आ जाय तो नफ़ा ही नफ़ा ।इस किताबमें आप सन्तोंसे मिलिये; महात्मा से मिलिये; राजनेताओं से मिलिये; बहादुर सूरमाओंसे मिलिये; नंगे फ़क़ीरों से मिलिये; कथवियासे मिलिये; और फिर चाहे नर नारायनोसे सिलिये, और पूजाके योग्य देवियों दौर नारियों से मिलिये.ज़रूरत तो इसकी बहुत दिनोंसे थी; अब आई अभी सही.यह ठीक है कि यह आपकी पूरी भूख न मिटा सकेगी; पर ज्ञानकी भूख मिटाना ठीक भी नहीं. और फिर ज्ञानकी भूख मिटा भी कौन सकता है ?४० प, हनुमान रोड, --सगवानदी न व वानद




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