समग्र भाग 3 | Samagra Vol 3

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Add Infomation AboutAcharya Vidyasagar
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
4 MB
कुल पष्ठ :
482
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)समग्र 3 /14अनिमेषअवलोकन करता हुआ
अपने को पायाघिरा हुआस्वतत्रता के दिव्य तेजोमय 1
द्वाभा मण्डल मेंविदित हुआ हैकिशुद्ध किन्तु सहज किया का
यह सूत्रपात है
यथाजात हैयही सचमुचरहा सब कुछमात तात हैतभी एक साथहो भू सात्तीनो करणमन वचन तनसानन्द सादरकिया प्रणिपात है
फलस्वरूपविशाल भाल पर
चरणरज कुन्दन कुकुम
अकित हुआ हैलग रहा हैतृतीय नेत्र उग रहा है
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