समग्र भाग 3 | Samagra Vol 3

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Samagra Vol 3  by आचार्य विद्यासागर - Acharya Vidyasagar

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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समग्र 3 /14 अनिमेष अवलोकन करता हुआ अपने को पाया घिरा हुआ स्वतत्रता के दिव्य तेजोमय 1 द्वाभा मण्डल में विदित हुआ है कि शुद्ध किन्तु सहज किया का यह सूत्रपात है यथाजात है यही सचमुच रहा सब कुछ मात तात है तभी एक साथ हो भू सात्‌ तीनो करण मन वचन तन सानन्द सादर किया प्रणिपात है फलस्वरूप विशाल भाल पर चरणरज कुन्दन कुकुम अकित हुआ है लग रहा है तृतीय नेत्र उग रहा है




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