बुन्देलखण्ड के लोकवाद्यों एवं अवनद्ध वाद्यों की बजौटी का सांगीतिक एवं लयात्मक अनुशीलन | Bundelakhand Ke Lokavadyon Avam Avanaddh Vadyon Ki Bajauti Ka Sangitik Avam Layatmak Anushilan

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Bundelakhand Ke Lokavadyon Avam Avanaddh Vadyon Ki Bajauti Ka Sangitik Avam Layatmak Anushilan  by एकता डेंगरे - Ekata Dengere

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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पुलिन्द जाति का प्रदेश मानते हैं । अतः पुलिन्द अपग्रंश बोलिन्द और बुन्देल मानते हैं |बुन्देलखण्ड शब्द का स्पष्ट अर्थ है, कि जिस क्षेत्र में बुन्देले ठाकुरों का राज्य रहा है उस क्षेत्र को बुन्देलखण्ड के नाम से पुकारा जाता है | बुन्देलखण्ड राज्य की स्थापना ईसा की जौदहतीं शताब्दी से मानी जाती है। उसी समय से इस भू-भाग को बुन्देलखण्ड के नाम से पुकारा जाता है। बुन्देलखण्ड राज्य की स्थापना सर्वप्रथम पंचम सिंह ने की थी। यह राज्य पहले गढ़कुंडार में स्थापित हुआ | बाद में इसकी राजधानी ओरछा बनायी गई | उस समय से ओरछा राज्य को ही बुन्देलखण्ड का प्रमुख केन्द्र माना जाता रहा। बुन्देलों ने अपना राज्य इस क्षेत्र में लगभग 1128 ई0 में स्थापित किया | इसके संस्थापक हेमकरण थे, जिन्हें पंचम सिंह के नाम से जाना जाता है। इस राज्य का विस्तार बाद में अकबर के काल में वीर सिंह बुन्देला ने किया। तत्पश्चात औरंगजेब के काल में बुन्देलखण्ड केसरी 'छत्रसाल' ने इस राज्य का विस्तार किया। . जहाँ तक छत्रसाल का राज्य रहा उस राज्य को बुन्देलखण्ड के नाम से पुकारा जाने लगा । उस समय इस क्षेत्र में बुन्देलों का शासन नही था, इस क्षेत्र में बुन्देलों से पहले यहाँ पर आदिवासी _ गोंड लोग रहा करते थे। इसलिए इस क्षेत्र को गोंडवाना भी कहते हैं। ' 'बुन्देलखण्ड के इतिहास के सर्वप्रथम लेखक मुंशी श्यामलाल ने 1876 ई0 में लिखा कि 650 पूर्व यह क्षेत्र गोंडवाना कहलाता था |'९इससे पहले यहाँ पर चंदेल वंशीय राजाओं का राज्य था। इस वंश का सबसे प्रतापी राजा जेज्जाक या जयशक्ति था| यह नाम चंदेलों के तथा उस समय के अन्य शिलालेखों में लिखा है।(0 बुन्देलखण्ड का इतिहास - योतीलाल त्रिपाठी अशान्त पर(2) बुन्देलखण्ड का ऐतिहासिक मूल्याक- राघाकृष्ण बुन्देली सत्यंथासा बुन्देली- फ0 2




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