सड़कवासी राम | Sadakavasi Ram

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Book Image : सड़कवासी राम  - Sadakavasi Ram
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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शुगा जंगतस भर जो रह गया है हमारा भाज;कोई'**कोई दूसरा नहीं लिखता किसी की भी नियतियह सब तोहमारे, हां हमारे सोच, हमारे कर्म का परिणाम, पानी जो मर गया हैअब कैसे सड-झगड से लें समझ के धडतिये सेपूरे भीतर को खीच दाहर निपट आदम-साउधाडने वाली भाषा;न जोड पाएंगे हम उनसे कभी आंखेंतो आा **आ उन्हे सुनकर हम अपना सत्यशिव तो से ही लें सुनें”**पावो की थपक वे भा रहे हैं '*हमसे ही नहींहमसे भी बहुत पहले दी जाती रहीकाली कामरी को बोच से ही फाड़करवे भा रहे हैं !भा, उनके नहींअपने ही बित्ता-भर रह गए भविप्यत के नामआ, चुपचाप बिछ जाएं सडक हो जाए उनके लिए !सड़कबासी राम / 19




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