नया हिन्दी साहित्य एक भूमिका | Naya Hindi Sahity Ek Bhumika

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
6 MB
कुल पष्ठ :
236
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)श्र च हिन्दी साहित्य की प्रगतिहै। वह कविता की अपेक्षा बम से अधिक रुपया कमा सकता है । उसके
ध्वंसात्मक खेल से कलाकार ग्लानि भी करने लगे हैं । कला वगस्वायों
का पूरी तरह सड्ट काल में साथ नहीं दे रही । अतः पश्चिम में रही-सही
विचार-स्वतन्त्रता भी नष्ट हो रही है । जर्मनी में गाड़ियाँ भर-भर कितात्रें
जला दी गईं, फ्रान्स के बन्दी-दह वाम-पार्थ के कलाकारों से परे पड़े थे।
हमारे देश में स्वतन्त्र विचारों की पुस्तकें आसानी से घुसनें नहीं पातीं 1आज पूँजीवादी संस्कृति संक्रान्ति काल में है । उसके चाण की भी
कोई आशा नहीं । इस संस्कृति के मग्ावशेषों को हटाकर हस एक़ नवीन
विराट संस्कृति की नींव रक्खेंगे, जो विशेष वर्ग की पूँजी न होकर एक
वर्ग-हीन समाज की जीवन-प्राण होगी । वायु और जल के समान वह
भविष्य में जन-जन के लिए. सुलभ होगी । “अर्थ” और 'काम' की साधना
अथवा श्ंखला न होकर वह मनुष्य के आगे बढ़ने का पथ प्रशस्त करेगी1मनुष्य का जीवन गतिशील है । संकुचित विचारों की परिधि में फंसे
कुछ कलाकार यद्यपि गति-रुद्ध हैं, जीवन की शक्तियों हमें आये बढ़ाती
ही रहती हैं। इन शक्तियों की गति में कुछ क्षणों के लिए हम अवरोध
डाल सकते हैं, किन्ठ सदैव के लिए उन्हें रोक नहीं सकते । हमें निश्चय
करना है, क्या साहित्य समाज की प्रगति में सहायक बनेगा, अधवा तटस्थरहने के भ्रम में प्रतिगामी शक्तियों की मदद करेगा ।.... सर्वहारा की सेना आगे बढ़ रददी है। उसकी विजय निश्चित है 1 विश्व
की नवीन-समाज-व्यवस्था शोपण और शोषक दल का सदा के लिए अन्त
कर देगी । नवीन संस्कृति इतिहास में पहली बार पूर्ण रूप. से जन-सच्ता-
त्मक होगी। तब आदिम-युग का अन्त होगा और सच्ची सभ्यता का आरंभ.
उस सम्यता की कल्नना करना भी हमारे लिए कठिन है ।इस: आनेवाले युग में प्रथ्वी, जल, वायु पर मनुष्य-मात्र का अधिकार
होगा | रंग-मंच, सिनेमा-रह, चित्रशालाएँ, रेडियो और उत्कृष्ट संगीत की
ध्वनि से मुखरित पार्क सर्वसाधारण के लिए. खुले होंगे; आवश्यकता के
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