एक हिंदी साहित्य : एक दृष्टि | Naya Hindi Sahitya : Ek Drishti
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
9 MB
कुल पष्ठ :
220
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)३ र५ ३ हिन्दी साहित्य की प्रगतिहमारे कवियों ने जीवन से सुख मोड़ अनन्तः को अपना राग
सुनाया है। हमारे ककानीकार केवछ मध्य-श्रेणी के जीवन-चित्र
खीचने में गे है । प्रेभचन्द् ने अवदय ही फैक्टरी और बाजारों
में जो नई पुकार उठी है; उसे सुना था और उनकी कछा में हमें
इसकी प्रतिध्वनि मिछती है। हिन्दी के एकाकी नाटककार “्रसाद'
अतीत के सुनददखे सपने देखने मे तछलीन जीवन के दुम्सहद दुम्स्वप्र न
देख सके ।
पन्त छ परिवर्तन मे देश का करन्दन व्यापक नाद् कर उटा है ।
कवि के हृदय की अन्तवेदना यदो विवश द्ाद्यकार कर उठी है ।
भज ते सौरभ छ मघुमाक्ष
दिदिर में भता सूती साध
वद्दी मधुऋतु की गुल्लिठत उल
झुकी थी जा यौवन के भार,
भक्व्बिता में निज तत्काठ
षिहर उठती,--जीवन दै भार !
भाज पावश्च-नद् के उद्गार
काल के बनते चिह करालः
प्रात का सोने का. ससार
जङ्ग देती सध्या कौ ज्वाल |
भखिल यौवन के रंग उभार
दृड़िपें के दिते कंन
क्चें के चिकने, काठे व्याक
कंचुली, कासि, पिषार
गुंजते है सबके दिनं चार,
सभी फिर दाहकर ॥
'रूपाभ' के जन्मा से पन्तजी के कान्य काभी पुनजैन्म हुआ
है ओर आपके छन्द् के बन्धः सुर गये है । शप्रम्या अभी तक् पन्ते
की स्वै-सबल ऊति हे ।१
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