सिध्द्पदार्थ विज्ञान | Sidh Padarth Vigyan

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Sidh Padarth Vigyan by अज्ञात - Unknown

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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ई मु थ दे री 1 सिद्रपदार्थ्यिधान ई लिंसी पेड की आस में खा छुपा ता सिंह ने लाठी का शा्दसी आनकर उस पर कपदा सारा ओर ठसकेा फंपडें समेत लेकर गठे में लापडा ओर चाट खाकर मरगया ॥_. . स्थाकर्षण बद्द गुण हो कि ठसके दाने से घर यक वस्तु टूंसरी वस्तु के अपनी ओर सोचती हे ध्याक्पण के कई प्रकार दें एदिला परमाज्वाकर्षण लिस से हर यक सस्तु के परमा आपस में यक टूसरें का सींचते हैं चार इफट्रे थने रदते हैं इस कारण से यह वस्तु कठोर देती हद दर सा यरमागुरों में आकर्पणणक्ति न होती ता अठ़व घस्सु के परमाणु जाशुकी सन की तरह से फेल रहते भ्रार टूव य॒स्तु के पर मासुष्पों ममी दे क्योकि पानी की बन्द अगुली के किनारे पर धंभी रइती दे इसका यद्द कारण थे कि पानी के परमाणु चाय के परमाणु के और दाथ के परमाणु पानी के परमादुच्यि के सीचते हैं परंतु कठोर वस्तु के परमायुभ्मा में करण शक्ति धिक रहती दे इस कारण उसके परमाणु कठिनता से लग दो से हैं भार टू वस्तु में घह शक्ति थाढी देसी दे इस कारण से ठसके परमाणु सहल में लग ९ छो खाते हें कचले हैं कि वाययोय यस्तुओं में ्राफपंखशक्ति नाम का मी नदी थे परतु भार वस्तु की सर्द उसमें भी पांच गुण पाये छाते हैं यदद घात सुद्धि में नददों ाती कि थायवीय वस्तु में आकरपेणणक्ति न हो परतु इसनी सात ठीफ कह से हैं कि रुसके परमाणुओं में आफ्ेसशक्ति इसनी थोड़ी हे कि क परमाणु टूसरे परमाणु के वहुस हो थाड़ा खींचता है भार इसलिये परमाणु मिन्न प रत हैं कपोकि दर यक प्रकार सो अस्पु में आकर्षण शक्ति न्यारी २




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