गीतामंथन | Geetamanthan

5 5/10 Ratings.
1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Geetamanthan  by किशोरलाल घनश्यामलाल मारारुषाला - Kishorlal Ghanshyamlal Mararushala

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about किशोरलाल घनश्यामलाल मारारुषाला - Kishorlal Ghanshyamlal Mararushala

Add Infomation AboutKishorlal Ghanshyamlal Mararushala

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
उपोदूघात प्र नियमों एवं सिद्दास्तों को सूदमत्ता श्र ब्यापकता की नित्य नहं प्रतीति होती जाती है । इसलिए, यद्द न समकना चादिए कि गीता कोई गोलमोल श्रथवा युप्त भाषा में लिखा ग्रन्थ है घर इसलिए वदद गूढ़ है । वात यह है कि हमारा जीवन निरन्तर विकासशील हैं श्रौीर उसका प्रथक्करण श्रासानी से नहीं होता, यही उसकी गूद॒ता का कारण है । दूसरे शब्दों में कहा जाय तो, गीता गूढ नहीं वल्कि जीवन यूढ़ है और चूंकि गीता जीवन से सम्बन्ध रखने बाला ग्रन्थ है इस कारण वह यूढ़-सा बन गया है । ्‌ गीता का मन्यन बार-बार करना क्यों श्रावश्यक है, वह इस सम्बन्ध में इतना कंड देने के वाद्‌ श्रव हम गीता की स्वना पर विचार करं । गीता महाभारत का एक भाग है । महाभारत को समान्यतः इतिदास कहा जाता है । किन्तु उसे साधारण श्रर्थ में इतिदास श्रथवा तवारीख या दिस्ट्रीकइना भूल है । चंद इतिहास नहीं बल्कि ऐतिद्दासिक काव्य है । पारडव श्रौर कौरव के जीबन की कई खास-खास घटनाओं का वर्णन करम के लिए कवि ने एक महाकाव्य के रूप मे उसकी रचना की है। कवि का उद्देश यदद नहीं कि चद्द घटना-क्रम का ज्यों-का-त्यों वणन करदे । उसका मुख्य उद्देश्य तो हैं एक मद्दाकाव्य की रचना करना, श्रौर उस महाकाव्य के लिए उसकी मुख्य योजना है कुरुच॑श के युद्ध को उसका श्वपना चिपय वनाना । ˆ चव्य हने के कारण इसकी कितनी हौ घटनाय, कितने दी पात्र रौर कितने ही विवरण श्नादि कल्पित हो सकते हं । इसमें श्रगर कहीं दो व्यक्तियों के बीच कोई संवाद श्राया है तो हमें यह नददीं समक सेना चाहिए कि चह्द संवाद किसी रिपोंटर का लिया ह्रौ थवा किपीने.च्यो-




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now