निशीथ - सूत्रम भाग - 2 | Nishith Sutram Bhag - 2

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
20 MB
कुल पष्ठ :
492
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)सुत्र संख्या
०-८
५०५१
५२
५३
*४-५५
५६
५७९1
५६.१-१५१-४धू --ण{ ९ 3विपय
शय्या-संस्तारक
परु षणतक के सिए लाये हए शय्या-सस्तारक को भ्रतिरिक्त
काल तकं रखने का निषेध
सचत्सरी के वाद दस रात्रि से अधिक समय तक
शय्यासंस्तारक रखने का निपेघ
वर्प मे मीगते हए शय्था-सस्तारक को उठा कर एक शभोर
नं रखने से लगने वले दोप
विना सागारिक की भ्रनुमति के प्रत्यर्पणीय शय्या-संस्तारकं
एकं स्थान से दूसरे स्थाम पर ले जने का निषेध
सागारिक के दय्या-संस्तारक को बिना श्रनुज्ञा के एक स्थान
से दूसरे स्थान में बाहर ले जाने का निपेघ
परत्यपंणीय शय्या-सस्तारक को बिनौ वापिस सौपे
विहार करने का निषेध
विद्ये हुए क्षग्या-संस्तारक को विना समेटे विहार करनै
का निपेधे
खोए गए शय्या-संस्तारक के न हू ढने प्रर लने वाले दोप
बिना प्रतिलेखन उपधि रखते का निषेध
उपधि-उपकरर के प्रकार
जिनकत्पिक उपधिं
स्थविरकट्पिक उपधिं
उपधि की प्रतिलेखना एव तत्म्बन्धी दोपभतृतीय उह शक
द्वितीय तथा तृतीयं उद् ्षक का सम्बन्ध
ग्रागंतागार, भरारामायार, गृहेपतिक्कुल भ्रादिसे
सम्बन्धित ्राहार
झ्रागंतागार ( मुसाफिर खाना ) श्रादि में जोर-जोर से
चिल्लाकर आहार मांगने का निपेघ, तत्सम्बन्धी दोष,
झपबाद आदिझागतागार श्रादि में कौतुक के निमित्त आने वाले से प्राहार
मागन कां निषेध, तस्सम्बन्धी दोप, श्रपवादं एव प्रायद्चित्गाथाङ्कु
१२१७-१३८६१२१७-१२४६३
१२४४-१२८०
१२०८ १-१२०५६१२०७-१२६६१३००-१२०६१३१०-१३१३
१३१४-१३०८६१३८७-१३८६
१३९०-१३६४१२३९५-१४१६
१४१७-१.४३७१४३८१४२३९-१४८११४३६१४४८१,४४६९-१४५७पृष्ठा
१४९-१८७१४६११५४
१५४-१६३
१६३-१६४
१६४-१६७
१६७
१६७-१६६
१६६-१७०
१७०-१८७
१८७4 -1-
१८८१८९६१८६ १६३
१६३-१६७१९६१९९-२०९१९९-२०१२०१-१०३
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