निशीथ - सूत्रम भाग - 2 | Nishith Sutram Bhag - 2

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Book Image : निशीथ - सूत्रम भाग - 2  - Nishith Sutram Bhag - 2
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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सुत्र संख्या ०-८ ५०५१ ५२ ५३ *४-५५ ५६ ५७९1 ५६.१-१५१-४धू --ण{ ९ 3विपय शय्या-संस्तारक परु षणतक के सिए लाये हए शय्या-सस्तारक को भ्रतिरिक्त काल तकं रखने का निषेध सचत्सरी के वाद दस रात्रि से अधिक समय तक शय्यासंस्तारक रखने का निपेघ वर्प मे मीगते हए शय्था-सस्तारक को उठा कर एक शभोर नं रखने से लगने वले दोप विना सागारिक की भ्रनुमति के प्रत्यर्पणीय शय्या-संस्तारकं एकं स्थान से दूसरे स्थाम पर ले जने का निषेध सागारिक के दय्या-संस्तारक को बिना श्रनुज्ञा के एक स्थान से दूसरे स्थान में बाहर ले जाने का निपेघ परत्यपंणीय शय्या-सस्तारक को बिनौ वापिस सौपे विहार करने का निषेध विद्ये हुए क्षग्या-संस्तारक को विना समेटे विहार करनै का निपेधे खोए गए शय्या-संस्तारक के न हू ढने प्रर लने वाले दोप बिना प्रतिलेखन उपधि रखते का निषेध उपधि-उपकरर के प्रकार जिनकत्पिक उपधिं स्थविरकट्पिक उपधिं उपधि की प्रतिलेखना एव तत्म्बन्धी दोपभतृतीय उह शक द्वितीय तथा तृतीयं उद्‌ ्षक का सम्बन्ध ग्रागंतागार, भरारामायार, गृहेपतिक्कुल भ्रादिसे सम्बन्धित ्राहार झ्रागंतागार ( मुसाफिर खाना ) श्रादि में जोर-जोर से चिल्लाकर आहार मांगने का निपेघ, तत्सम्बन्धी दोष, झपबाद आदिझागतागार श्रादि में कौतुक के निमित्त आने वाले से प्राहार मागन कां निषेध, तस्सम्बन्धी दोप, श्रपवादं एव प्रायद्चित्गाथाङ्कु १२१७-१३८६१२१७-१२४६३ १२४४-१२८० १२०८ १-१२०५६१२०७-१२६६१३००-१२०६१३१०-१३१३ १३१४-१३०८६१३८७-१३८६ १३९०-१३६४१२३९५-१४१६ १४१७-१.४३७१४३८१४२३९-१४८११४३६१४४८१,४४६९-१४५७पृष्ठा १४९-१८७१४६११५४ १५४-१६३ १६३-१६४ १६४-१६७ १६७ १६७-१६६ १६६-१७० १७०-१८७ १८७4 -1- १८८१८९६१८६ १६३ १६३-१६७१९६१९९-२०९१९९-२०१२०१-१०३




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