द्वंद्वगीत | Dwandageet
श्रेणी : साहित्य / Literature

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Add Infomation AboutRajeshvar Prasad Singh
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
3 MB
कुल पष्ठ :
72
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)द्रन्द्रगीरष ¢९४भ करती खराद की,रुके नहीं यह क्रम तेरा ।
अभी फूल मोती पर गढ़ दे,अभी वृत्त का दे घेरा।
जीवन का यह दर्द मधुर है,तू न. व्यथे उपचार करे ।
किसी तरह ऊपा तक टिमटिमजलने दे दीपक मेरा |पुरचलने१६स्या पृदक खद्योत, कौन सुखचमक - चमक दिप जने में!
सोच रहा कसी उमंग हैजलते - से परवाने में ।
हाँ, स्वाधीन सुखी है, लेकिन,आओ व्याधा के कीर, बता,
केसा दै आनन्द जाल में `तड़प - तड़प. रह जने में?
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