कनुप्रिया | Knupriya
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
1 MB
कुल पष्ठ :
81
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)नहीं मेंरे सांवरे,!पमुना के नीछ़े जल मेंमेरा यह् वेतस छता सा क्रांपता तन-विम्ब, और उसके चारों
ओर् स्वरी गहराई का अथाह प्रसार, जानते हों
कसा छंगता है--मानो यह यमुना की सांवली गहरा्र नहींयह तुम हो जो मारे भावरण दूर यारमे चारों ओर से कण-कण रोम-सेमभपनें ब्यामल प्रयाढ़ अधाह आलिगन में पोर-पोरउप हे2क्र त =!
कसे हुए हो !यह् क्या तुम समभते हो
घुण्टों-- जल में--में अपने को निहार्ती हूं
नहीं मेर॑ सांवर !१८ .शनुत्रिपा
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