कनुप्रिया | Knupriya

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Book Image : कनुप्रिया - Knupriya
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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नहीं मेंरे सांवरे,!पमुना के नीछ़े जल मेंमेरा यह्‌ वेतस छता सा क्रांपता तन-विम्ब, और उसके चारों ओर्‌ स्वरी गहराई का अथाह प्रसार, जानते हों कसा छंगता है--मानो यह यमुना की सांवली गहरा्र नहींयह तुम हो जो मारे भावरण दूर यारमे चारों ओर से कण-कण रोम-सेमभपनें ब्यामल प्रयाढ़ अधाह आलिगन में पोर-पोरउप हे2क्र त =! कसे हुए हो !यह्‌ क्या तुम समभते हो घुण्टों-- जल में--में अपने को निहार्ती हूं नहीं मेर॑ सांवर !१८ .शनुत्रिपा




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