जीवानन्दनम् | Jeewa Nandanam

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Jeewa Nandanam by अत्रिदेव विद्यालंकार - Atridev vidyalankar

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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हू ११ 3 मरइठोंगे तंजौरको जौता श्रौर १६७६ से १८५५. तक राष्य किया । यह समय बहुत सुख श्र शास्तिका था। तीन सौ पचास साले वीच ९ नायकोकि समयको मिलाकर ) एकं सौ बीस से झधिक लेखकोंने उत्तम भरेणीकी स्वना की थी । इन सब राजाओं में मददाराजा सरोफ़जी ने इस कार्यमें सबसे झाषिक रस लिया था, जिन्होंने तंजौरमें महाराजा सरस्वती पहल पुस्तकालबकी स्थापना की थी | नायक श्रौर महाराष्ट्र राजाश्योंकी वंश परम्परा सिम्नसूपमें है--- नायक राज { १५६५-१६७४ ईस्वी पीछे ) १. कृवप्प्स ( सवप्पा ) १५६५१५६१ । २. स्युतप्पा { श्रह्ुतष्या ) १५६११६१४ } ३. रघुनाथ १६१४१६३३ ¦ ४. दविजवराघव १३३३--१६७१३ । मरहठा यजा ( १६७६-५ दैष्वी पीठे ) दैकोजी १ १६७६-१६८द प्रतापसिह १७४११७६४ शाइजी ३ ६८्४८-९७१० ७, तुकाजी २ १७६५१७८७ सरोफ़ली १ १७१११७२० ८. अमरसिह १७८८१७९९ तुकाी 9 १७२९१७३५ ९, सरोष़जी ५. डेकोजी २ या महाराज २ १८००--१८६३२ भावा साहिन ५७६६१७३६ १०. शिवाजी ५८४२१८५१ इनमें शाहजी, सरोफजी १, तुकाजी $, रईैकोजी २, स्वयं श्रच्े कवि थे | शाइजी दूसरे मरइठा राजा ये । इनके नाम के विषयमे क जात है कि इनके पिता के जन को पुन्न नहीं हुआ, तब शाह शरीफ नामव फकीर के श्राशीर्वाद से पुत्र का जन्म हुश्ाथा । इसीके उपलब्ष में व लद्केका नाम शाइजी स्कखा गया या। ये स्वथं श्रच्छ कवि थे इन्होंने परिंडतों को एक ग्राम शादजी पुरम्‌ ( तिरविखनलौर्‌ ) नामः न्प हर ही




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