भारत छोड़ो आन्दोलन | Bharat Chodo Aandolan

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Bharat Chodo Aandolan by शंकर दायल सिंह

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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और उसमें प्रतिदिन एक मुद्दी अन्न डाल दे कांग्रेस अथवा देश के माम पर! इस तरह कांग्रेस की सबसे बड़ी शक्ति गांधी बने और गांधीजी की सबसे बड़ी शक्ति कांग्रेस बनी| दूसरे शब्दों में देश ने अथवा जनता ने गांधीजी को अपनाया और गांधी ने जन-साधारण को गले लगाया। गांधी नाम संज्ञा की जगह विशेषण हो गया और उसके इर्द-यिर्द एक प्रभा-मंडल बना देश के सभी योग्य सपूतों का-मोतीलाल नेहरू, सर तेज बहादुर सप्रू, भूलाभाई देसाई, जवाहरलाल नेहरू, डॉ० राजेन्द्र प्रसाद, सरदार वल्लभ भाई पढेले, खान अब्दुल गफ्फार खां, राजगोपालाचारी, मौलाना आजाद, महादेव देसाई, जमनालाल बजाज, सरोजिनी' नायछू विधानचन्द्रराय, प्री० अब्दुल बारी, पट्टाभि सीतारामय्या, राजकुमारी अमृत्त कौर, वारदौलाई कोई तो ऐसा न था उस युग में जो गांधी-टीम की सदस्य न हो। गांधीजी ने देश में न केवल राष्ट्रीय जागरति की शुरूआत की, वरनू ठोस कार्यक्रमों के आधार पर जर्जर राष्ट्र को निर्भय बनाना और संगठित करना शुरू किया। उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि केवल शहरी पढ़े-लिखे लोगों तक ही उन्होंने अपने को सीमित नहीं रखा, बल्कि गांवों -देहातों में रहने वाले किसान-मजदूर-नौजवान सबों को जगाया, झकझौरा तथा आन्दोलन में उनको बड़ी भूमिका दी। तभी तो यह संभव हो सका. कि 1942 के आन्दोलन में ग्रामीण किसानों -मजदूरों की संख्या 40 प्रतिशत थी। 1921 से लेकर 941 तक बीस चर्षों के प्रशिक्षण के बाद गांधीजी ने ऊंत में 'करो या मरो' का मारा देते हुए आजादी की अन्तिम लड़ाई छेड़ दी। सही जर्थी में भारत छोड़ो औन्दोलन', जो अंग्रेजों , भारत छोड़ो की गुहार थी नारा न होकर संकल्प हो गया, प्रस्ताव नहीं प्रेरणा बना तथा बयान नहीं होकर व्यवहार हो गया। 1942 की क्राम्ति हमारी आजादी के इतिहास का सबसे सशक्त और ज्योतित परिच्छेद है। 8 अगस्त, 1942 को कांग्रेस द्वारा इस प्रश्ताव का पारित क्रिया जाना, उसी रात कांग्रेस के सभी वरिष्ठ नेताओं की जेल के सींकचचों में बंद कर दिया जाना, 9 अगस्त से जनता द्वारा स्वयं अपने हाथ में क्रांति की मशाल




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