डॉ लोहिया का समाजवादी दर्शन | Dr. Lohiya Ka Samajvadi Darshan
श्रेणी : इतिहास / History

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
5 MB
कुल पष्ठ :
286
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)जीवन गौर व्यक्तित्व | २वम्बई के मारवाड़ी विद्यालय के अपने छात्र साथियां को हृटताल का सकते
कर उनपा नेतृत्व कया । इसी समय गाधी जी के असहयोग आन्दोलन से
प्रभावित होकर उ होने विद्यालय हा त्याग वर दिया और अपन वौ स्वत तत्ता
संग्राम वी महारि में भाव दिया । यहीं से उनका सघप का जीवन प्रारम्भ
हाता है। उददोंने विदशी वसा के जलाने, ट्राम गाड़ियों के तार बाटने गौर
विद्यां वस्म श्यै होली जलाने मे उग्र दल का नतृत्व किया 1
असटयोग ज लोलन बै समय ही गाधी जी वम्बरई गए । उनके पिता
हीरावाल, डॉ० लाहिया वा लेकर गाधी जी ते मिलने गए 1 वही अपनी आदत
कै मरिपरीत उहानं गाधीजी के चरण स्पेश विए और गाधी ने उनकी पीठ
थपथपाई । सन १६२४ई० मे लोहिया एक प्रतिनिधि के रूप में गया मे हुए काग्रेस
अभिवेशन मं सम्मिलित हुए । खदर पहनना बगैर उसी का प्रचार वरना उनका
प्रमुख उद्देश्य या। १९०८ में. साइमन वापस जाओ के लिए कलकत्ता मं
लोहिया न विद्या्रियों को बमीशन वे इस वहिप्वार वे लिए तथार क्या और
उनपा नेतृत्व किया । जमनी' के भारतीय विद्याधियों द्वारा निर्मित मध्य युरीप
हिंदुस्तानी सघ' नामव' सस्या के लोहिया मश्री बने । इस सस्था ने भारत मे
बाहर भारतीय राष्टीयता वा प्रचार-काय विया।
भारतोग राष्ट्रीय कांग्रेस से प्रतिबद्धता --सन १९३४ ई० मे जव 'वाग्रेस
सोशनिस्ट पाटी कं निर्माण हमा था तमी “वाग्रेस सोशलिस्ट' नामक साप्ता-
ल्वि मुखपत प्रारम्भ हुआ जिसके ० लाहिया सम्पादक वने । सन १९३५ ६०
भें पर्ति नेदरू की अष्यणताम हृण् वाग्रे जधिवेशन म वाग्रे ने अपनी
अखिल भारतीय समिति के अतगत एवं पर राष्ट्र विभाग खाला और लौहिया
उस पर राष्ट्र विभाग के मंत्री हुए । सन् १६३८ ई० में परराष्ट्र विभाग मे
मत्री पट से त्यागपत्र दिया किन्तु इस काय-वाल में लोहिया का व्यक्तित्स
भारतीय राजनीति भे एव प्रतिमावान विचाखः भौर परराषटर-नीति बै विल
प्रवक्ता में रूप के सवमान्य हो चुदवा था ।
क
भ सं (1 न भारते के स्वतवरता-सग्राम व नया एव
(0 या ए म्नलिकिति चार सूती धायत्रम तयार किया
शा विगेध (र्) देलौ रियारतों मे भान्दोलन (द) ब्रिटिश5 हि माल उतारन व लादने से इन्कार करने वाले मजदूरों वा1--फिन्दी पिरत साण्डः 10 ष्ट १6६ दृथामती अरदो चमा बारण्यो)
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