मिनखपणा रौ मोल | Minakhapana Rau Mol

5 5/10 Ratings.
1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
श्रेणी :
शेयर जरूर करें
Minakhapana Rau Mol by श्री पुष्कर मुनि जी महाराज - Shri Pushkar Muni Maharaj

एक विचार :

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

श्री पुष्कर मुनि जी महाराज - Shri Pushkar Muni Maharaj के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है | जानकारी जोड़ें |

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(देखने के लिए क्लिक करें | click to expand)
मिनलपणा रो सात ढ्‌एवा इन करण लाग्या है, धरती धराद द रदत नन सीक जग बणगी है इण तर सू मानयें भ्यद पति पी सर फूक नै सुरग रा दवतारवा तक न चने ददन टू दिन री परुठ मिछ जावण ू ससार रो नाघ्रश्रर निमाग नना दी मूठया से बघग्यी है । यार तौ मानय सुरग रो वैमद विलर नाय्यो है प्रण झट खण कदर श्रापरां श्रदलणों भावी देयय गठ्गनेद ग्न 2? हिन्दा रौ घठक्णान गरिणण री, मन रा व्दा न्द नापण रो श्रर बुद्धि री पीड़ा न परखद री छठ श्न कीवोदहै? कादि मानमा न ठ्ठ मुख री षग टएए न मिढी है? वाई उण वदई श्राईं जा र~ कीवी के इण सुरंग री सहनाइया र सार र टन हाहाकार द्धप्याड ह ? उणर हिरा, मन श्रःच्ट हैँ असाती सी ज्वादामुखी घघक रह्यो टै, वौ डरा रखा रा वमव ने सिंताक दिन टिकण देवजा 7 नदन श्रात्मिक सुदरता रो रूचडी किताक टिन्य रह एड र्य सका? जठा ताईं मानसा रमन ङे न्निट ट डे नहीं गाज, हिरदा म ग्यान रो सहनाई न ~ ~ भौतिक प्रमति, वारला वमव भरर नन श = ~ एतदा वसेवद्‌ द कौमतनीहै। मव रप माग्गकाटोस भर राग्यो ई इयर य ~= ~




User Reviews

अभी इस पुस्तक का कोई भी Review उपलब्ध नहीं है | कृपया अपना Review दें |

अपना Review देने के लिए लॉग इन करें |
आप फेसबुक, गूगल प्लस अथवा ट्विटर के साथ लॉग इन कर सकते हैं | लॉग इन करने के लिए निम्न में से किसी भी आइकॉन पर क्लिक करें :