टूटी हुई बिखरी हुई | Tuty Hui Bikhari Hui

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Tuty Hui Bikhari Hui by शमशेर बहादुर सिंह - Shamsher Bhahdur Singh

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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रात्रि 1 में मींच कर आँखें पिः जसे क्षितिज तुमको खो उमा हूँ । 2 यो दसारे साँस के सूर्य ! सांस की गंगा अनवरत बहु रही है । तुम कहाँ डूबे हुए हो ? त्यी विद्व हैर / 1




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