हिंदी नाटक साहित्य का इतिहास | Hindi Natak Sahitya Ka Itihaas
श्रेणी : इतिहास / History, नाटक/ Drama

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
77.95 MB
कुल पष्ठ :
361
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)का इतिहास है ।( ४ )
आशावादी रहे हैं; अतएव इन प्रवृत्तियों की अभिव्यंजना हमारे
नाटकों में स्वाभाविक है। जीवन की दुखान्तवादिता वतमान
युग की देन है । हम उस प्रभाव से.बच नहीं सके हैं । अतरवयही उचित है कि जीवन के ग्रदर्शन-साधन नाटक उसकेसाहित्य को हम केबल एक ही दृष्टिकोण से न देख कर उसे
युग के वातावरण में देखें और तब कोई परिणाम निकालें ।
नाटक साहित्य को कसने के लिए यहीं कसौटी रखी गई है ।
प्रस्तुत इतिहास के परिणाम इसी आधार का फल हैं ।
' हिन्दी नाटकों का झारंभआलोच्यकाल में लिखे गए हिन्दी नाटकों के दो रूप इस
समय मिलते हैं--साहित्यिक आर रंगमंचीय । पहली श्रेणी केनाटक अधिकांश में काव्यत्व से भरपूर हे और दूसरे वर्ग में
रंगमंचीय आावश्यकताश्यों की पूर्ति पर ध्यान अधिक दियागया है । आगे चलकर भी ये दोनों धारायें प्रथक् प्रथकू रूप सेवेगवती होकर हमारे साहित्य को आम्ाचित करती रहीं । श्यतणवहिन्दी नाटक साहित्य का इतिहास वास्तव में इन्हीं दोनों घाराजिप्रश्न हो सकता है कि रंगमंचीय नाटकों को साहित्य में
स्थान क्यों दिया जाय ? झारंभ में दही यह संकेत कर दिया गयाहै कि नाटक दृश्य-काव्य है और अभिनेय होना उसका आवश्यक
_ लचण है । इस दृष्टि से आदर्श कहे. जाने वाले नाटक तो वहीं.
होंगे जिन में दोनों बतंमान हों । परन्तु उपलब्ध साहित्य मेंमटर पद
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