संक्षिप्त केशव | Sankshipt Keshav

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Sankshipt Keshav by रामसिंह - Ramsingh

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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संच्िप्त केशव १५ सीखने लगे । श्रव उ संस्कृत का मुख ताकने की आवश्यकता नहीं रह गई । रसिकप्रिया महाराजकुमार इन्द्रजीत के ग्रनुरोध से लिखी गई यी। इसमे रस श्रौर रस-सामग्री के विविध उपादार्नो का वर्णन है । शृङ्गाररस को वहत प्रधानता दी गई रै । ्रन्यान्य रो को शृङ्गार मे ही परिगखित कर दिया गया है | इस म्न्थमे १६ प्रकाश हैं जिनमें निम्न लिखित विषयों का वणन है-- (१) श्वारके दो मेद्‌ संयोग श्रौर वियोग (२) नायकके भेद (३) नायिका के मेद (४) दर्शन श्र श्रवण (५४) दम्पति चेष्टा और मिलन (६) विभाव, माव श्रौर हाव (७ ) ऋष्ट प्रकार नायिका (८ ) पूवनुराग (६ ) मान विप्रलम्भ ( १० ) मान-मोचन ( ११) विप्रलम्भ ८ १२) करुण श्रौर प्रवास विप्रलम्भ (१२ ) सखियाँ (१३) सखी-कम (१४ ) शज्ार के अतिरिक्त श्रन्य रस ( १५. ) कैशिकी यूत्तियाँ ( १६ ) रस-झनरस




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