बंगाल का काल | Bangaal Kaa Kaal

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutHarivansh Rai Bachchan
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
2 MB
कुल पष्ठ :
72
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about हरिवंश राय बच्चन - Harivansh Rai Bachchan
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)बंगाल का काल
खाती बूढ़े और जवान,
नि्ममता सें एक समान;
वंग भूमि बन गदं राक्षसी--
कहते ही लो कटी ज़बान 1...
राम-रमा !
क्षमा-क्षमा !
माता को राक्षसी कह गया !
पाप शांत हो,
दूर भ्रांति हो ।
ठीक, अन्नपूर्णा कं आंचल
मे ह सवस,
अन्न तथा रस,
पड़ा न सूखा,
बाढ़ न आई
और नहीं आया टिड्डी दल,
कितु बंग हे भूखा, भूखा, भूखा !
माता के आँचल की निधियाँ
२
User Reviews
No Reviews | Add Yours...